चुकंदर में पाया जाने वाला एक तत्व अल्जाइमर रोकने में मदद कर सकता है. इसी तत्व की वजह से चुकंदर का रंग लाल होता है. इससे अल्जाइमर बीमारी की दवा विकसित की जा सकती है. शोध के निष्कर्षो से पता चला है कि चुकंदर के रस में बीटानिन तत्व पाया जाता है, जो दिमाग में मिसफोल्डेड प्रोटीन के संचय को धीमा कर सकता है. मिसफोल्डेड प्रोटीन का संचय अल्जाइमर बीमारी से जुड़ा होता है.

साउथ फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के ली-जून मिंग ने कहा, “हमारे आंकड़ों से पता चलता है कि बीटानिन दिमाग में कुछ रासायनिक क्रियाओं के लिए एक अवरोधक का काम करता है, जो अल्जाइमर बीमारी के होने में शामिल होते हैं.”

बीटा-एमालॉएड एक चिपचिपा प्रोटीन का टुकड़ा या पेप्टाइड होता है, जो कि दिमाग में जमा होता है. यह दिमाग की कोशिकाओं के संचार में बाधा डालता है. इन दिमाग की कोशिकाओं को न्यूरॉन्स कहते हैं. सबसे ज्यादा नुकसान तब होता है, जब बीटा-एमालॉएड खुद को धातुओं जैसे लोहा या तांबे से जोड़ लेता है.

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इन धातुओं से बीटा-एमालॉएड पेप्टाइड एक समूह में बंध जाते हैं, जिससे सूजन व ऑक्सीकरण बढ़ सकता है.

कई बीमारियों में फायदेमंद

लाल रंग का दिखने वाला चुकंदर सेहत के लिए कई मायनों में फायदेमंद है. इसके रस को पीने से खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है. चुकंदर में अच्छी मात्रा में विटामिन और खनिज होते हैं जो रक्त शोधन के काम में सहायक होते हैं. इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करते हैं. यह प्राकृतिक शर्करा का स्रोत होता है. इसमें आयरन, सोडियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस और अन्य महत्वपूर्ण विटामिन पाए जाते हैं.