‘मेेरी ड्यूटी शुक्रवार शाम 5 बजे खत्म हुई तो मैं घर चला गया। रात में यहां कोई गार्ड नहीं रहता है। महिदपुर के एक गार्ड को मुझे नई खरीदी हुई झाड़ू देना थी जो एटीएम में रखी थी। यह देने के लिए मैं शुक्रवार शाम 7 से रात 8 बजे के बीच एटीएम पहुंचा। एटीएम का शटर गिरा हुआ था। पास में ही स्थित जिला कोषालय के गार्ड रूम के दो गार्ड खड़े थे। मैंने उनसे पूछा शटर क्यों गिरा हुआ है तो उन्होंने कहा बैंक वाले ही अंदर कुछ कर रहे हैं। मैंने शटर उठाया तो दो युवक अंदर एटीएम के साथ कुछ रहे थे। उनके हेलमेट एटीएम पर रखे थे। मैंने पूछा कहां से आए तो उन्होंने कहा रोल डालने (पर्ची का कागज) आए हैं। मैंने पूछा किसने भेजा और इंजीनियर मनोज विश्वकर्मा को कॉल किया। उनसे उनकी बात करवाई तो एटीएम से निकले एक युवक ने अपना नाम हरिओम बताया। जब इंजीनियर से बात हो गई तो मैंने उन्हें नहीं रोका। युवकों में एक की उम्र 25 से 30 और दूसरे की 30 से 40 के बीच है। फिर मैं भी वहां से चला गया। सुबह 8 बजे फिर ड्यूटी पर आ गया, दोपहर 12 बजे इंजीनियर मनोज विश्वकर्मा, कस्टोडियन (एटीएम में नोट भरने वाले) सिद्धार्थ दलोर, जितेंद्र पांचाल और हरिओम आए तो पता चला रुपए गायब हो गए हैं।’
(जैसा एटीएम गार्ड महेश राव ने बताया।)

तत्काल अलर्ट का मैसेज पहुंचता है 6 लोगों को
1. एटीएम में डबल सेफ्टी लॉक रहता है। इसे कांबिशन लॉक बोलते हैं। जहां से नोट भरे जाते हैं। वहां यह रहता है। इसका बोल्ट टूटता भी नहीं है। सिर्फ नोट भरने वाला ऑपरेटर ही इसे खोल सकता है।
2.इस लॉक से किसी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर सूचना मुंबई स्थित एटीएम के स्विच सेंटर पहुंचती है। यहां से 5 मिनट में मशीन ऑपरेटर के साथ बैंक के चैनल मैनेजर के पास पहुंचती है। एटीएम से छेड़छाड़ हुई तो सूचना पास के थाने में देना पड़ती है।
3. एटीएम में नोट फंस गया या खराब नोट आने पर सूचना चैनल मैनेजर व मशीन ऑपरेटर के पास पहुंचती है। बैंक वालों को जाकर चैक करना पड़ता है।
4. एटीएम में पेपर रोल खत्म होने, कनेक्टिविटी फेल होने या बेटरी डाउन होने पर ऑपरेटर के पास मैसेज पहुंचता है। इस पर वे पहुंचकर मेंटेनेंस करते हैं।
इनकी रही लापरवाही
शुक्रवार रात 8 बजे बाद एटीएम बंद हो गया था। इसकी जानकारी अलर्ट मैसेज से बैंक मैनेजर, एटीएम इंजीनियर और कस्टोडियन एजेंसी के कर्मचारियों को मिल गई थी। एटीएम बंद होने के 12 घंटे बाद भी इनमें से किसी ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया, ना ही किसी ने घटना स्थल पर पहुंचने तक की जहमत उठाई।
11 साल पहले भी एटीएम से चोरी हुए थे 11 लाख, यही तरीका था
– इसके पहले दो बत्ती स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम से 11 साल पहले भी 11 लाख रुपए चोरी हुए थे। उस समय भी चोरी का यही तरीका था। पासवर्ड डालकर एटीएम से रुपए निकाल लिए थे।
– एटीएम खाली होने का मैसेज मिलने पर सुबह जब बैंक की टीम कैश भरने के लिए पहुंची तो पता चला। बगैर एटीएम में तोड़फोड़ के रुपए निकले तो जांच में पासवर्ड डालकर एटीएम से रुपए निकलना मिला।
– पुलिस ने बैंक मैनेजर, चैनल मैनेजर, एटीएम का मेंटेनेंस करने वाले बैंककर्मियों सहित 50 से ज्यादा बैंक से जुड़े लोगों से लगातार 40 दिन तक पूछताछ की थी। इस पर एक आरोपी पकड़ में आया था।
– आरोपी ने 11 लाख रुपए में से 1 लाख रुपए खर्च कर दिए थे। आरोपी ने 10 लाख रुपए कोर्ट में जमा कराए। कोर्ट ने यह राशि बैंक के सुपुर्द की थी। मामला अभी कोर्ट में चल रहा है।
– गौरतलब है कि यह शहर का पहला एटीएम था। इसके बाद एटीएम को यहां से सामने की पट्टी में शिफ्ट कर दिया था।
– दो महीने पहले शास्त्रीनगर स्थित एटीएम में भी हो चुकी है छेड़छाड़- दो महीने पहले शास्त्रीनगर स्थित एसबीआई के एटीएम में भी छेड़छाड़ हो चुकी है। यहां किसी ने रात में रुपए निकालने के लिए एटीएम में तोड़फोड़ की थी। इस एटीएम का संचालन भी एजेंसी ही करती है। उस दौरान चैनल मैनेजर ने जांच की बात कही थी।
शक की सुई इन तीन कस्टोडियन पर
सिद्धार्थ दलोर : एटीएम का पासवर्ड पता रहता है। रुपए डालने की जिम्मेदारी है।
जितेंद्र पांचाल: पासवर्ड पता है। रुपए डालने व रोल लगाने की जिम्मेदारी है।
हरिओम मालवीय: इसे भी पासवर्ड पता है। एटीएम मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी है।