RAJASTHAN: 1971 में हमारे जांबाजों ने पाक रेंजर्स को था खदेड़ा, जुड़ी है इस मंदिर की स्टोरी

श्रीगंगानगर. जिले की श्रीकरणपुर भारत-पाक की इंटरनेशनल बॉर्डर से महज एक किमी दूरी पर बसे गांव नग्गी में एक ऐसा मंदिर है, जिसकी कहानी अपने आप में अनूठी है। खास बात यह है कि मंदिर के आसपास कोई आबादी नहीं, फिर भी सेना इस मंदिर की देखरेख और सार-संभाल करती है। आस्था तो ऐसी है कि सेना के बड़े से बड़े अफसर ही क्यों ना हों, यहां से बिना दर्शन किए नहीं जाते और मान्यता यह है कि यहां से जाे भी मांगो, पूरा होता ही है। 
RAJASTHAN: 1971 में हमारे जांबाजों ने पाक रेंजर्स को था खदेड़ा, जुड़ी है इस मंदिर की स्टोरी

जुड़ी है इस मंदिर की कहानी…

– 1971 के सेंट ड्यून युद्ध में यहां के दुर्गा मंदिर को ख्याति मिली। युद्ध से पहले यहां कोई मंदिर नहीं था, लेकिन सेना का मानना है कि युद्ध के दौरान लाल वस्त्रों में मां दुर्गा ने सेना को जीत का मार्ग दिखाया था। इसलिए सेना ने ही जीतने के बाद इस मंदिर को बनवाया। सेना का मानना है, मां दुर्गा की बदौलत ही यहां के युद्ध में सबसे कम वक्त में जीत हासिल हुई।
– इस जगह भारतीय सेना के 21 जवान शहीद हुए थे। उन्हीं की याद में स्मारक भी बनाया गया है। उसकी देखरेख भी सेना ही करती है। सेना ने यहां एक पंडित भी रखा है जो सुबह-शाम पूजा पाठ करते हैं।
– यही नहीं, मंदिर का जीर्णोद्धार भी सेना ही कराती है और हाल ही में मंदिर की मरम्मत पर सेना ने 11 लाख रुपए खर्च किए हैं। हर साल 28 दिसंबर को यहां मंदिर में मेला भरता है और शहीदों को याद किया जाता है, जिसमें सेना के बड़े अफसर जरूर पहुंचते हैं।

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पाक सेना ने किया था दो किमी पर कब्जा, इसलिए हुआ था युद्ध

– सेना जवानों और गांववालों ने भास्कर को बताया कि 1971 के युद्ध विराम के बाद पाक सेना ने नग्गी के उत्तर में गांव के नजदीक दो किमी क्षेत्र में भारतीय रेतीली भूमि पर कब्जा जमा लिया। पाक सेना ने इसमें दो फीट चौड़ी एंटी टैंक माइंस बिछा दी और भारी गोला बारूद के साथ पाक सेना तैनात हो गई। गश्त पर निकली बीएसएफ पार्टी पर पाक रेंजर्स ने गोलीबारी कर दी जिसमें बीएसएफ का एक जवान शहीद हो गया।
– 26 दिसम्बर को सेना की 4 पैरा रेजीमेंट की सी कम्पनी को शाम 6 बजे नग्गी मूव करने के आदेश मिले। 27 की देर रात 12 बजे भारतीय सेना ने मोर्चा संभाला।
– 28 दिसम्बर को सुबह 4 बजे भारतीय सेना ने तोपखाना पलटन के साथ उत्तर पूर्व की ओर हमला बोला। सेना की बी कम्पनी को नग्गी भेजा गया, जिसने पूर्व की और से पाक सेना पर हमला कर दिया। भारतीय सेना ने 3 घंटे के इस युद्ध में सुबह 7 बजे अपनी मातृभूमि पर वापिस कब्जा कर लिया। श्रीगंगानगर में ही करणपुर अकेला ऐसा इलाका था, जहां यह लड़ाई लड़ी गई थी।
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