इमरान का बयान घर में ही हैं जम्मू-कश्मीर के लिए मुसीबतें, सबसे बड़ा आतंकी चेहरा बना…

पिछले कुछ हफ्तों में जम्मू-कश्मीर में बड़े आतंकी हमलों और गोलाबारी की ज़िम्मेदारी लेने वाले ब्रांड-न्यू टेररिस्ट संगठन रेसिस्टेंस फ्रंट को पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के तीन शीर्ष संचालकों द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है। नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकारों को सौंपी गई खुफिया रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई है। टीआरएफ को पिछले साल के अंत में तब लॉन्च किया गया जब संसद ने जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को समाप्त किया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों, लद्दाख और जम्मू और कश्मीर में विभाजित किया।

ये पाकिस्तान को इस्लामिक आतंकी समूहों को प्रायोजित करने के लिए रूपरेखा तैयार की गई है। इंटेलिजेंसी की खहर के अनुसार  इस संगठन को लश्कर के नेताओं ने तैयार किया है। हिन्दुस्तान टाइम्स के पास मौजूद इंटेलिजेंस रिपोर्ट की प्रति में कहा गया है कि टीआरएफ को पाकिस्तान से शीर्ष तीन लश्कर संचालकों द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है। दक्षिण कश्मीर के लिए सजाद जट्ट, मध्य कश्मीर के लिए खालिद और उत्तरी कश्मीर के लिए हंजला अदनान।

सुरक्षा अधिकारियों ने कहा,  स्थानीय युवाओं को भर्ती  करने के लिए टीआरएफ को तैयार किया गया है। अप्रैल की शुरुआत में जब केरन सेक्टर में पांच आतंकवादी और समान संख्या में सेना के जवान मारे गए थे, तो  पाकिस्तान से टीआरएफ के सोशल मीडिया प्रबंधकों ने जिम्मेदारी ली थी। समूह ने इस सप्ताह के अंत में हंदवाड़ा में गोलाबारी के लिए भी जिम्मेदारी का दावा किया था, जिसमें एक कर्नल समेत 5 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।

हाल के हमलों के लेकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट कर कहा था कि “कश्मीरी प्रतिरोध भारत के कश्मीरियों के उत्पीड़न और क्रूरता का प्रत्यक्ष परिणाम है।”खान ने इस दावे को रेखांकित किया कि कश्मीर की मुसीबतें घर में थीं।

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