कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कहा कि अगर नियोक्ता भविष्य निधि में योगदान को ईपीएफओ के पास समय पर जमा नहीं करते हैं, वह इसकी सूचना अपने अंशधारकों को देगा. फिलहाल ईपीएफओ पंजीकृत सार्वभौमिक खाता संख्या (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) रखने वाले अंशधारकों के खाते में केवल जमा राशि के बारे में ही एसएमएस : ईमेल के जरिए सूचना देता है.

ईपीएफओ ने एक बयान में कहा, ‘‘ जिन सदस्यों का योगदान समय पर जमा नहीं होता, उसके बारे में सूचना नहीं दी जाती. पारदर्शिता बढ़ाने के इरादे से यह निर्णय किया गया है कि उन अंशधारकों को एसएमएस: ई-मेल (जिन्होंने यूएएन खाते में अपना मोबाइल नंबर: ई- मेल पंजीकरण कराया है) के जरिए यह सूचना दी जाएगी जिनके नियोक्ताओं ने संबंधित महीने का समय पर योगदान राशि ईपीएफओ के पास जमा नहीं कराई. ’’

संगठन के अनुसार अब योगदान राशि जमा किए जाने के बारे में जानकारी ई- पासबुक आनलाइन तथा उमंग मोबाइल एप के जरिये भी उपलब्ध होगी. इसके अलावा सदस्यों ‘ मिस्ड काल ’ सेवा के जरिये भी सूचना प्राप्त कर सकते हैं. जिन ईपीएफओ सदस्यों का मासिक योगदान नियमित तौर पर प्राप्त होता है , वे उक्त विकल्पों का उपयोग कर अपना योगदान देख सकते हैं. पीएफओ के अंशधारकों की संख्या 5 करोड़ से अधिक है। संगठन 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक कोष का प्रबंधन करता है.

ईपीएफओ के लिए तीन महीने की योजना

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के खाताधारकों को चालू वित्त वर्ष के दौरान अपने भविष्य निधि खाते से शेयर बाजार में निवेश को तय सीमा से कम अथवा अधिक करने का विकल्प मिल सकता है. ईपीएफओ की योजना तीन महीने में ईटीएफ निवेश को पीएफ खाते में जमा करने की सुविधा देने की है. ईपीएफओ के केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त वी. पी. जॉय ने हाल ही में कहा था कि हमें खाताधारकों को उनका ईटीएफ निवेश पीएफ खाते में हस्तांतरित करने की सहुलियत देने के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करना होगा. इसमें दो से तीन महीने का समय लग सकता है.

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उन्होंने आगे बताया था कि एक बार ऐसा कर लेने के बाद हम अगले चरण में जाएंगे जिसके तहत सदस्यों को शेयर बाजारों में निवेश घटाने-बढ़ाने की सुविधा मिलेगी. ईपीएफओ की शीर्ष निर्णय इकाई केंद्रीय न्यासी बोर्ड (सीबीटी) ने खाताधारकों को शेयर निवेश की मौजूदा 15 प्रतिशत की अनिवार्य सीमा से अधिक या कम निवेश की सुविधा उपलब्ध कराने की संभावनाएं तलाशने की पिछले सप्ताह मंजूरी दी थी.