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पति पत्नी ने शुरू किया था रक्षाबंधन का त्यौहार, इतिहास जानकर नही होगा यकीन

राखी का त्यौहार भाई बहन के प्यार रिश्ता होता है हिंदू धर्म में राखी के त्यौहार को प्यार का त्योहार कहा जाता है और यह प्यार भाई बहन का प्यार होता है हिंदू धर्म में रक्षाबंधन को पवित्र त्यौहार माना जाता है इस त्योहार का जितनी बेसब्री से बहने इंतजार करती है उतनी ही बेसब्री से भाई भी राखी के त्योहार का इंतजार करता है

साल भर भले ही भाई-बहन लड़ते झगड़ते हो और एक दूसरे को परेशान करते हो लेकिन इस दिन भाई और बहन का प्यार सातवें आसमान पर हो होता है रक्षाबंधन के दिन भाई बहन आपसी मतभेद को भूलकर इस त्यौहार को बड़े ही हंसी और उल्लास के साथ मनाते हैं बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांध कर उसे सौ बरस जीने का आशीर्वाद देती है वही भाई अपनी बहन की रक्षा करने की कसम खाता है कि वह मरते दम तक अपनी बहन की रक्षा करेगा.

कब मनाया जाता है रक्षाबंधन :

रक्षाबंधन के त्यौहार को श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है लेकिन रक्षाबंधन मनाने से पहले इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि शुभ मुहूर्त हे भी या नहीं क्योंकि कई बार अशुभ मुहूर्त में रक्षाबंधन का त्यौहार मनाने से कई तरह की परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है.

केसे शुरू हुआ राखी का त्यौहार :

रक्षाबंधन के त्यौहार को भाई बहन का त्यौहार भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन बहनें अपने भाई को रक्षा कवच या बांधती है लेकिन क्या आप जानते हैं राखी का त्यौहार किसने शुरू किया आप सोच रहे होंगे कि यह भाई बहन का त्यौहार है तो भाई बहन ने ही इस त्यौहार का प्रारंभ किया होगा लेकिन आप गलत सोच रहे हैं क्योंकि रक्षाबंधन के त्यौहार को भाई-बहन ने नहीं पति और पत्नी ने शुरु किया था तभी से रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाने लगा.

पति पत्नी ने शुरू किया रक्षा बंधन :

आपको यह बात जानकर तो हैरानी ही हो रही होगी कि रक्षाबंधन के त्यौहार को भाई बहन ने नहीं बल्कि पति और पत्नी ने प्रारंभ किया था जिसके बाद हर कोई रक्षाबंधन का त्यौहार मनाने लगा.

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पुराणों के अनुसार :

पुराणों में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जब देवताओं पर दानवों ने आक्रमण किया था तब युद्ध में दानव देवताओं पर हावी हो गए थे उस समय देवता दान से  हारने लग गए थे यह सब कुछ देख देवराज इंद्र की पत्नी अत्यधिक घबरा गई जिसके बाद उन्होंने अपने पति इंद्र के प्राणों की रक्षा करने के लिए तप करना शुरु कर दिया और तप से उन्हें रक्षासूत्र का फल प्राप्त हुआ और इस रक्षा सूत्र को शनि ने श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई पर बांध दिया था रक्षासूत्र के बांधते ही देवताओं की शक्ति बढ़ गई थी और उन्होंने दानवों पर विजय प्राप्त की.

भाई के आलावा किसे बांधे राखी :

रक्षाबंधन पर बांधे जाने वाले इस रक्षा सूत्र को भाई की कलाई पर बांधा जाता है पुराणों में इस बात का उल्लेख किया गया है कि आप भाई के अलावा और भी कई व्यक्तियों को राखी बांध सकते हैं पुराणों की यदि माना जाए तो यह रक्षासूत्र उन सभी व्यक्तियों की कलाई पर बांधना चाहिए. जिनकी रक्षा करना आप चाहते है. 

सिर्फ राखी ही नही बांधे:

बहन ने अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र तो बांध देती है लेकिन वह यह बात भूल जाते की सिर्फ रक्षासूत्र बांधने से लाभ नहीं मिलता बल्कि राखी बांधते समय मंत्रों का सही उच्चारण भी जरुरी होता है राखी तभी प्रभावशाली होती है जब मंत्रों के साथ यह रक्षासूत्र भाई की कलाई पर बांधा जाए.

राखी का मंत्र :

येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबलः!

तेन त्वां प्रतिबध्नामि, रक्षे! मा चल! मा चल!!

राखी से जुडी कथा :

वामन पुराण के अनुसार जब भगवान विष्णु ने राजा बलि से उनका सब कुछ तीन पग में ही ले लिया था तो राजा बलि ने वरदान स्वरुप भगवान विष्णु से पाताल में रहने का निवेदन किया था और उसके बाद भगवान विष्णु उनके साथ पाताल में चले गए थे यह देख माता लक्ष्मी अत्यधिक व्याकुल हो गई थी और वह दुखी वामन से भगवान विष्णु को मुक्त करवाने के लिए 1 दिन माता ने महिला का रूप धारण कर पाताल में जा पहुंची और उन्होंने राखी बांधकर वामन को अपना भाई बना लिया

जब राखी बांधने के बाद वामन ने माता लक्ष्मी से कुछ मांगने के लिए कहा तब माता लक्ष्मी ने चतुराई से भगवान विष्णु को बैकुंठ भेजने के लिए उन से निवेदन किया राखी बांधने के बाद बहन की इच्छा को पूरी करने के लिए भगवान विष्णु को वामन ने वैकुंठ जाने दिया लेकिन वैकुंठ जाते समय भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि चतुर्मास की अवधि में वह पाताल में निवास करेंगे तभी से भगवान विष्णु 4 महीने पाताल में निवास करते हैं.

 
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