चम्मच हमारे घरों तक कैसे पहुंचा? कब और कहां हुआ इसका आविष्कार

चम्मच हर भारतीय घर में होता है. लेकिन कभी आपने सोचा कि ये आया कहां से? इसका आविष्कार कब और कहां हुआ. सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर सनथ नारायण (@SanathNarayan) नाम के एक यूजर ने लोगों से यही पूछा. लिखा, मैं यह पता लगाने जा रहा हूं कि भारत में हर किसी के पास यह चम्मच क्यों है? लोगों ने अपनी-अपनी जानकारी के हिसाब से जवाब दिए. एक यूजर ने लिखा, शायद यह किराना प्रोडक्ट के साथ प्रचार आइटम था. आज भी इनमें से 3-4 मेरे पास हैं. शायद यह किसी चाय ब्रांड से जुड़ा होगा. लेकिन क्या यही सच है, आइए जानते हैं.
चम्मच हमारे पास उपलब्ध सबसे ज्यादा उपयोग किए जाने वाले बर्तनों में से एक है. ऐसा लगता है कि यह सदियों से हमारे बीच मौजूद रहा हो. लेकिन जब हम इसका इतिहास खंगालने की कोशिश करते हैं, तो बेहद दिलचस्प कहानी सामने आती है. acsilver की रिपोर्ट के मुताबिक, पुरातात्विक खोजों से पता चलता है कि पहला चम्मच 1,000 ईसा पूर्व में बना था. तब इसे मुख्य रूप से सजावट या धार्मिक उपयोग के लिए इस्तेमाल किया जाता था.
मिस्र में सबसे पहले बने लकड़ी के चम्मच
ऐतिहासिक साक्ष्यों के मुताबिक, प्राचीन मिस्रवासी सबसे पहले लकड़ी, चकमक पत्थर और हाथी दांत से बने चम्मचों का उपयोग करते थे. ये काफी प्रभावशाली होते थे. इनकी डिजाइन बेहद खास होती थी. संभवतः इसका उद्देश्य सजावट के लिए इस्तेमाल करना था. क्योंकि वे अपने कटोरे पर भी जटिल धार्मिक दृश्य अंकित किया करते थे. इन्हें इलेस्ट्रेटर और रेखा चित्रों के जरिये सजाया जाता था. बाद में, ग्रीक और रोमन साम्राज्यों के दौरान चम्मच कांस्य और चांदी से तैयार किए जाने लगे. चूंकि वे महंगी धातुओं से बने होते थे, इसलिए ज्यादातर अमीर परिवारों के लोग ही इनका इस्तेमाल करते थे.
फिर सोने-चांदी के तैयार होने लगे
यूरोप में मध्ययुगीन काल की शुरुआत (476 ई. – 1492) में सींग, लकड़ी, पीतल और जस्ता से चम्मच तैयार किए जाने लगे. ये काफी सरल थे और बेहद खूबसूरत नजर आते थे. अंग्रेजों ने के इतिहास में चम्मच का सबसे पहला उल्लेख 1259 में एडवर्ड प्रथम के समय का है. तब आलमारी में इसे रखने की बात कही गई. 15वीं शताब्दी तक मामूली लकड़ी के चम्मचों का स्थान धातु के चम्मचों ने लेना शुरू कर दिया. अलिजबेटन काल के दौरान इसे कई आकार में पेश किया जाने लगा.





