किराये पर रहती थी हनीप्रीत, ऐसी जगह राम रहीम ने रखा हाथ बदल गई किस्‍मत

नई दिल्‍ली : डेरा प्रमुख राम रहीम के साथ हेलीकॉप्‍टर से रोहतक जेल आकर सुर्खियों में आई हनीप्रीत कौर पर नए-नए खुलासे हो रहे हैं. डेरामुखी को सोमवार को रेप के दो मामलों में विशेष सीबीआई अदालत ने 10-10 साल की सजा सुनाई. इस तरह डेरा प्रमुख को 20 साल जेल में रहना होगा क्योंकि एक के बाद एक सजा चलेगी. राम रहीम सिंह पर दोनों मामले में 15-15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. राम रहीम के बाद बाबा के साथ हर समय साये की तरह रहने वाली हनीप्रीत के बारे में कई जानकारियां मीडिया में सामने आ रही हैं.

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Honeypreet Kaur

हाल ही में यह भी खबर आई थी कि राम रहीम ने पुलिस अधिकारियों को धमकी देते हुए कहा था कि अगर मेरी बात नहीं मानी तो सीएम को बोलकर सस्पेंड करवा दूंगा. दरअसल राम रहीम जेल में अपने साथ मुंह बोली बेटी हनीप्रीत को साथ रखना चाहता था. पेशी वाले दिन ही राम रहीम ने बीमारी की बात कहते हुए एप्लीकेशन दायर की थी. इस दौरान उसने अपने वकील के जरिए कहा कि हनीप्रीत जेल में डेरामुखी के साथ रहना चाहती है.RAAM RAHEEM

जेल मैनुअल के हिसाब से महिला जेल में साथ नहीं रह सकती थी लेकिन जेल प्रशासन ने हनीप्रीत को करीब 2 घंटे तक वीआईपी रिटायरिंग रूम में राम रहीम के साथ रहने दिया. इसके बाद राम रहीम को रेस्ट हाउस से जेल ले जाया जा रहा था लेकिन उसने कमर दर्द माइग्रेन के चलते कहा कि कोर्ट ने हनीप्रीत को साथ रखने की मौखिक इजाजत दी है. राम रहीम ने अफसरों को बात नहीं मानने पर सीएम और मंत्री को फोन लगाकर सस्पेंड कराने की धमकी दी.Ramriram was above his daughter on the bed

इस प्रकरण में सबसे ज्‍यादा चर्चा में आई 37 वर्षीय हनीप्रीत. हनीप्रीत को राम रहीम ने साल 2009 में गोद लिया था. फेसबुक पर खुद को डेरामुखी का वारिस घोषित करने वाली हनीप्रीत का असली नाम प्रिंयका तनेजा है. सूत्रों की माने तो डेरे में हनीप्रीत का रौब भी राम रहीम की तरह ही चलता है. मूल रूप से फतेहाबाद की रहने वाली हनीप्रीत उर्फ प्रियंका तनेजा के परिवार को जाननले वालों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में ही इस परिवार की किस्‍मत बदल गई.

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प्रियंका तनेजा (हनीप्रीत) का परिवार 1988 से 1998 तक चार मरला कॉलोनी में पीएनबी बैंक के पीछे एक संकरी गली में किराये के मकान में रहता था. त‍ब प्रियंका स्प्रिंग डेल स्‍कूल में 9वीं कक्षा में पढ़ती थी. उसके दादा डेरा के अनुयायी थे. उस समय प्रियंका भी परिवार के साथ डेरा जाती थी और इसी दौरान वह बाबा के संपर्क में आई.

हनीप्रीत के दादा रामशरण दास डेरा के कैशियर बन गए. इसके बाद परिवार ने जगजीवनपुरा में अपना मकान बना लिया और उसमें रहने लगे. उसके पिता रामानंद ने फतेहाबाद में टायरों की कंपनी की डीलरशिप ले ली. लेकिन हनीप्रीत का परिवार अपने मकान में ज्‍यादा दिन नहीं रुका और चार साल में ही डेरे में शिफ्ट हो गया. कुछ वर्षों तक कभी- कभी परिवार फतेहाबाद आता था मगर बाद में अपना यहां का मकान भी बेच दिया.

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