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उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व में रेल ट्रैक पर लगेंगे हाइटेक सेंसर और कैमरे

रायवाला, ऋषिकेश: राजाजी टाइगर रिजर्व में रेल ट्रैक पर बढ़ती हाथियों की मौत से चिंतित पार्क प्रशासन ने इनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। इसके तहत रेल ट्रैक पर होने वाले हादसों को रोकने के लिए हाईटेक निगहबानी की तैयारी शुरू की गई है। अब पार्क क्षेत्र से गुजरने वाली रेलवे लाइन पर सेंसर व कैमरे के जरिये नजर रखी जाएगी।  उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व में रेल ट्रैक पर लगेंगे हाइटेक सेंसर और कैमरे

हरिद्वार-दून रेल ट्रैक पर सेंसर लगाने के लिए मोतीचूर से कांसरो के बीच संवेदनशील स्थान चिह्नित किए गए हैं। फिलहाल ट्रैक पर 400 मीटर एरिया में प्रायोगिक तौर पर सेंसर लगाए जाएंगे। यह रेल ट्रैक से गुजरने वाले हाथियों पर नजर रखेंगे और इसकी सूचना सुरक्षा कर्मियों को मिलती रहेगी। सेंसर जमीन के भीतर करीब तीन फीट की गहराई में लगेंगे। इसके लिए रेलवे पहले ही सहमति दे चुका है। वन्य जीव विशेषज्ञों के मुताबिक प्रयोग सफल रहा तो हाथियों की सुरक्षा और ट्रैक पर होने वाले हादसों को रोकने में यह तरीका सर्वाधिक उपयोगी साबित हो सकता है।  

30 से 60 मीटर की दूरी पर लगेंगे सेंसर 

ट्रैक के आसपास हाथी के होने की सूचना समय रहते सुरक्षा कर्मियों व लोको पायलट को मिल सके, इसके लिए रेलवे ट्रैक के दोनों ओर 30 व 60 मीटर की दूरी पर सेंसर व कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे। यह सेंसर ट्रैक से 60 मीटर दूर तक होने वाली हलचल व हाथी की मौजूदगी की सूचना तत्काल कांसरो, मोतीचूर व रायवाला रेलवे स्टेशन और वन विभाग की चौकी पर लगे संयंत्र को भेज देगा। यहां से संबंधित अधिकारी वाकी-टॉकी से तुरंत लोको पायलट को इसकी सूचना दे सकेंगे। 

टीम ने किया निरीक्षण 

शनिवार को पार्क अधिकारियों के साथ केंद्रीय विज्ञान एवं पर्यावरण मंत्रालय और भारतीय वन्य जीव संस्थान के विशेषज्ञों ने रायवाला के पास मोतीचूर से कांसरो तक रेल ट्रैक का निरीक्षण कर संवेदनशील स्थान चिह्नित किए। इस मौके पर पार्क के उपनिदेशक वैभव सिंह,, कांसरो के रेंज अधिकारी दिनेश प्रसाद उनियाल, डब्ल्यूटीआइ (वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया) के वन्य जीव विशेषज्ञ विभाष पांडु, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ (विश्व प्रकृति निधि) के एके सिंह, टीम प्रभारी डॉ. अपर्णा, विपुल, अपूर्वा आदि मौजूद रहे। 

बेहद संवेदनशील है क्षेत्र 

हरिद्वार-दून रेल ट्रैक पर मोतीचूर से लेकर कांसरो तक का करीब दस किमी क्षेत्र बेहद संवेदनशील है। परंपरागत गलियारा होने की वजह से यहां वन्य जीवों की आवाजाही अधिक है। लेकिन, उनकी इस स्वच्छंद आवाजाही में रेल ट्रैक सबसे बड़ी बाधा है। ऐसे में कई बार हादसे भी हो जाते हैं। बीते वर्ष 15 अक्टूबर को रायवाला के पास ट्रेन से टकराकर एक मादा हाथी की मौत हो गई थी। जबकि, इस वर्ष 17 फरवरी को एक शिशु हाथी और 20 मार्च को मादा हाथी की मौत हुई।

नौ मार्च को एक हाथी जख्मी हुआ। पार्क बनने से लेकर अब तक इस ट्रैक पर 29 हाथियों की मौत ट्रेन से टकराने के कारण हुई। राजाजी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वैभव सिंह ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट को हर परिस्थिति के अनुसार जांचा जाएगा। सफलता मिली तो पूरे ट्रैक के संवेदनशील स्थानों पर सेंसर लगाए जाएंगे। इससे निश्चित तौर पर हादसों में कमी आएगी। यह वन्य जीव व इंसान, दोनों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। 

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