आरुषी मर्डर केस में HC आज सुना सकती है ये बड़ा फैसला…
इलाहाबाद.आरुषि-हेमराज मर्डर केस में सीबीआई कोर्ट के फैसले के खिलाफ तलवार दंपति की अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट गुरुवार को फैसला सुना सकता है। सीबीआई कोर्ट ने आरुषि के माता-पिता राजेश और नुपुर तलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ अपील पर सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस बीके नारायण और जस्टिस एके मिश्रा की बेंच ने 7 सितंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसले के लिए अदालत ने 12 अक्टूबर की तारीख तय की थी।

डासना जेल में बंद हैं तलवार दंपति
– तलवार दंपति अभी गाजियाबाद की डासना जेल में बंद है। उल्लेखनीय है कि मई, 2008 में 14 साल की आरुषि का शव उसके नोएडा के जलवायु विहार स्थित घर में मिला था।
– घर के नौकर हेमराज का शव भी दो दिन बाद मकान की छत पर मिला था। सीबीआई कोर्ट ने आरुषि के माता-पिता को ही हत्या का दोषी ठहराते हुए 26 नवंबर 2013 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
क्या है पूरा मामला Q&A में समझें
1) क्या है ये मामला ?
– 16 मई 2008 को दिल्ली से सटे नोएडा के जलवायु विहार स्थित घर में 14 साल की आरुषि का मर्डर कर दिया गया था। आरुषि की हत्या गला रेत कर की गई थी। करीब साढ़े पांच साल चली जांच और सुनवाई के बाद सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने उसके माता-पिता नूपुर और राजेश तलवार को दोषी करार दिया।
– यह मामला लंबे वक्त तक सुर्खियों में छाया रहा था। लोग आरुषि के कातिलों को सजा दिलाने के लिए सड़कों पर उतर आए थे। उस वक्त उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी।
2) कितने लोगों का मर्डर हुआ था?
– दो लोगों का मर्डर हुआ था। आरुषि और हेमराज का। हेमराज (45) की बॉडी आरुषि के मर्डर के एक दिन बाद तलवार दंपती की छत पर एक कूलर में मिली थी। बता दें कि हेमराज तलवार दंपती के घर पर काम करता था।
3) कितने लोग इस केस में सस्पेक्ट माने गए?
-इस केस में पहले कुल पांच लोगों को सस्पेक्ट माना गया।
4) अभी कहां सजा काट रहे हैं तलवार दंपती
5) इलाहाबादहाईकोर्ट में आखिरी सुनवाई कब हुई?
6) कौन हैं तलवार दंपती?
7) इस केस की कितनी टीम ने जांच की?
– इसके बाद, सितंबर 2009 में फिर से सीबीआई की दूसरी टीम ने जांच शुरू की। इस बार सीबीआई के अफसर एजीएल कौर ने जांच शुरू की। उन्होंने तलवार दंपती को प्राइम सस्पेक्ट माना।
8) कब क्या हुआ ?
– 18 मई 2008: जांच में यूपी एसटीएफ को भी लगाया गया। पुलिस ने कहा कि दोनों मर्डर बेहद सफाई से किए गए। साथ ही, पुलिस ने माना कि मर्डर में परिवार से जुड़े किसी शख्स का हाथ है।
– 21 मई, 2008: यूपी पुलिस के साथ ही दिल्ली पुलिस भी जांच में शामिल हुई।
– 22 मई, 2008: आरुषि की हत्या के ऑनर किलिंग होने का शक पुलिस ने जाहिर किया। इस पहलू से भी जांच शुरू की गई। पुलिस ने आरुषि के लगातार संपर्क में रहे एक नजदीकी दोस्त से भी पूछताछ की। इस दोस्त से आरुषि ने 45 दिनों में 688 बार फोन पर बात की थी।
– 29 मई, 2008: जांच सीबीआई के हवाले।
– 01 जून, 2008 : सीबीआई ने जांच शुरू की।
– 03 जून, 2008: कम्पाउंडर कृष्णा को पूछताछ के लिए सीबीआई ने हिरासत में लिया।
– 27 जून, 2008 : नौकर राजकुमार को अरेस्ट किया गया।
– 12 जुलाई, 2008 : नौकर विजय मंडल अरेस्ट डॉ. तलवार को जमानत मिली।
– 29 दिसंबर, 2010:सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट लगाई। गाजियाबाद कोर्ट ने नौकरों को क्लीन चिट दी, लेकिन पेरेंट्स के रोल पर सवाल उठाए।
– 09 फरवरी, 2011:मामले में तलवार दंपती बने आरोपी।
– 21 फरवरी, 2011: दंपती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपील की। हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट को इनके खिलाफ सुनवाई शुरू करने के आदेश दिए।
– 19 मार्च, 2011: सुप्रीम कोर्ट गए। वहां भी राहत नहीं मिली।
– 11 जून, 2012:सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एस लाल ने की।
– 26 नवंबर, 2013 : नूपुर और राजेश तलवार को उम्रकैद की सजा। जस्टिस एस लाल ने 208 पेज का जजमेंट सुनाया था।





