राजधानी में मिलेंगे 81 फीट ऊंचे हनुमानजी के दर्शन, देशी-विदेशी पाच क्विंटल फूलों से मंदिर की सजावट

- in राज्य, लखनऊ

कलियुग के जागृत देव श्रीरामभक्त हनुमान, जिनका नाम लेने मात्र से सारे दु:ख दूर हो जाते हैं, ज्येष्ठ के बड़े मंगल पर उनकी पूजा-अर्चना को भक्त तैयार हैं। पवनसुत के गुणगान के लिए जहा मंदिरों में तैयारिया अंतिम दौर में चल रही हैं, वहीं श्रगार के लिए बुकिंग पूरी हो गई है। आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि एक मई को शुद्ध ज्येष्ठ मास की शुरुआत होगी। 16 मई से अधिक ज्येष्ठ मास की शुरुआत होगी। 28 जून को शुद्ध ज्येष्ठ मास का समापन होगा। पहला बड़ा मंगल एक मई को पड़ेगा तो दूसरा आठ मई, तीसरा 15 मई, चौथा 22 मई और पाचवा 29 मई को पड़ेगा। छठा पाच जून, सातवा 12 जून, आठवा 19 जून और अंतिम 26 जून को पड़ेगा।

राजधानी में मिलेंगे 81 फीट ऊंचे हनुमानजी के दर्शन, देशी-विदेशी पाच क्विंटल फूलों से मंदिर की सजावट

देशी-विदेशी पाच क्विंटल फूलों से मंदिर की सजावट

 पक्कापुल स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर में 29 को अखंड रामायण पाठ से आयोजन शुरू हो जाएंगे। पुजारी श्रीराम ने बताया कि हर मंगल को भंडारा होगा। अलीगंज के नए हनुमान मंदिर में पहले दिन देशी-विदेशी पाच क्विंटल फूलों से मंदिर को सजाया जाएगा। अलीगंज के पुराने व नए मंदिरों के पास मेला लगेगा। हनुमान सेतु मंदिर में दर्शन की अलग से व्यवस्था की गई है। हजरतगंज स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर, बीरबल साहनी मार्ग स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के अलावा लेटे हुए हनुमान मंदिर पर भी श्रद्धालुओं के दर्शन के विशेष इंतजाम किए गए हैं।

विराजेंगे 81 फीट के हनुमानजी

अलीगंज के सेक्टर क्यू स्थित मा विंध्याचल देवी मंदिर में 81 फीट के बजरंग बली नजर आएंगे। एक मई से पहले बड़े मंगल से इसका निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। ज्येष्ठ के सभी नौ मंगल पर राम नाम पत्र लिखकर प्रतिमा के अंदर रखा जाएगा। मंदिर के पुजारी सूर्य कुमार तिवारी ने बताया कि 705 करोड़ 60 लाख पत्र प्रतिमा में रखे जाएंगे। कैदियों की ओर से पिछले छह वर्षो से राम नाम के पत्र लिखे जा रहे हैं। उन्हें भी प्रतिमा में स्थान दिया जाएगा। पंचमुखी प्रतिमा का निर्माण छह महीने के अंदर पूरा हो जाएगा। मा का सिद्धपीठ करीब साढ़े चार सौ वर्ष पुराना है।

अलीगंज हनुमान मंदिर से हुई थी मेले की शुरुआत

ज्येष्ठ के पहले बड़े मंगल की शुरुआत अलीगंज के पुराने हनुमान मंदिर परिसर में मेले के रूप में हुई थी। इतिहासविद डॉ.योगेश प्रवीन ने बताया कि नवाब सआदत अली के कार्यकाल (1798-1814) के दौरान मंदिर का निर्माण हुआ था। उन्होंने अपनी मा आलिया बेगम के कहने पर मंदिर का निर्माण कराया था। संतान सुख की प्राप्ति होने पर आलिया बेगम ने मंदिर के निर्माण का वादा किया था। मंदिर के गुंबद पर चाद की आकृति हंिदू-मुस्लिम एकता की कहानी बया करता है। मंदिरों के निर्माण के बाद से यहा मेला लगने लगा। तब से यह परंपरा चलती आ रही है। पड़ी परिक्रमा करते हुए श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यह भी कहा जाता है कि केसर का व्यापार करने व्यापारी आए थे राजधानी आए थे। उनका केसर बिक नहीं रहा था। नवाब वाजिद अली शाह ने पूरा केसर खरीद लिया था। वह महीना ज्येष्ठ का था और मंगल था। व्यापारियों ने यहा भंडारा लगाया था। सोने-चादी से सजेंगे बालाजी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

कराटे खिलाड़ियों ने उत्तीर्ण की ब्लैक बेल्ट परीक्षा

लखनऊ। जापान सोतो कान कराटे डू कनिंजुकु ऑर्गनाइजेशन के