GST: नहीं कम किए रेट, तो 18% ब्याज के साथ देना पड़ सकता है हर्जाना

जीएसटी परिषद ने 200 से भी ज्यादा उत्पादों के रेट में बदलाव किया है. इसके बाद कई ज्यादा उत्पाद सस्ते हो गए हैं, लेकिन इसके बाद भी कई दुकानदार हैं, जो मुनाफाखोरी कर रहे हैं. अब इनसे निपटने के लिए मुनाफाखोरी विरोधी समिति बनाई गई है. यह समिति न सिर्फ आपकी मुनाफाखोरी से जुड़ी आपकी शिकायतों को सुनेगी, बल्कि यह ऐसा करने वाले के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी.
बनेंगी दो समिति
सरकार ने मुनाफाखोरी विरोधी समिति कैसे काम करेगी और दंड के क्या प्रावधान वह कर सकती है. इसको लेकर जानकारी दी है. केंद्र सरकार की तरफ से किए गए एक ट्वीट में इस समिति को लेकर पूरी जानकारी दी गई है. इसके मुताबिक एक केंद्रीय स्तर पर और एक राज्य स्तर पर मुनाफाखोरी विरोधी समिति है.
करेगी आम ग्राहकों के हितों की रक्षा
ट्वीट में कहा गया है कि अगर आम लोगों को जीएसटी के घटे रेट का फायदा नहीं दिया जाता है. या फिर उनसे जीएसटी के नाम पर किसी भी तरह की धोखाधड़ी की जाती है, तो यह समिति उनके हितों की रक्षा करेगी. अगर कोई दुकानदार आपके साथ धोखाधड़ी या मुनाफाखोरी करने का दोषी पाया जाता है, तो मुनाफाखोरी विरोधी समिति उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकती है. इसके लिए समिति चाहे तो दुकानदार को उत्पाद की कीमतें घटाने के लिए कह सकती है.
ये है प्रावधान
इसके अलावा वह दुकानदार को प्राप्तकर्ता को मूल्य में कमी के रूप में नहीं दिए गए लाभ के बराबर राशि लौटाने का आदेश दे सकती है. दुकानदार को यह राशि 18 फीसदी ब्याज के साथ देनी होगी.
लगा सकती है जुर्माना भी
यह समिति दुकानदार पर जुर्माना भी लगा सकती है. किसी दुकानदार पर कितना जुर्माना लगेगा. यह इस पर निर्भर करेगा कि उसकी तरफ से की गई मुनाफाखोरी कितने बड़े स्तर की है. समिति के पास यह भी अधिकार है कि वह चाहे तो आपूर्तिकर्ता का रजिस्ट्रेशन भी कैंसल कर सकती है. इसके लिए दोषी को कारोबार करने में काफी दिक्कते पेश आ सकती हैं.
कैसे करें शिकायत
केंद्र सरकार की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक अगर मुनाफाखोरी का मामला केंद्र स्तर का बनता है, तो इसकी शिकायत आपको राष्ट्रीय स्तर पर देनी होगी. अगर शिकायत राज्य स्तर की है, तो इसके लिए आपको राज्य स्तरीय मुनाफाखोरी विरोधी समिति की स्थायी समिति के सामने अपनी शिकायत करनी होगी.
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इसके बाद तय होगी सजा
शिकायत दर्ज होने के बाद मुनाफाखोरी विरोधी समिति सजा को लेकर फैसला लेगी. यह फैसला जुर्माना लगाने से लेकर ग्राहक को पैसे लौटाने तक की हो सकती है.





