इतना पुराना है गणेश चतुर्थी मनाने का इतिहास, जानकर नही होगा यकीन

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हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद महीने की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी को पर्व मनाया जाता है। इसकी शुरुआत शुक्ल चतुर्थी के दिन होती है। आमतौर पर यह 19 अगस्त से 20 सितम्बर के बीच आता है और इसे 10 से 12 दिन तक मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के आखरी दिन को अनंतचतुर्दशी कहते हैं और इस दिन गणेशजी की मूर्तियों को पवित्र जल में विसर्जित किया जाता है। क्या आप जानतें है कि गणेश चतुर्थी की शुरुआत कैसे हुई थी। चलिए आपको बताते है कि इस पर्व की शुरुआत कैसे हुई थी। इतिहास के अनुसार सोलहवी सदी में छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल के दौरान गणेश चतुर्थी के त्योहार को मनाया जाता था। इसी त्योहार के चलते महारानी जीजाबाई भोंसले और छत्रपति शिवाजी महाराज (जो तब 12 वर्ष के थे) ने सन् 1939 में पुणे के प्रसिद्ध ‘श्री कसबा गणपति’ की स्थापना की।

छ्त्रपति के शासन के बाद पेशवाओं के राज्य काल में गणेश चतुर्थी को और भी महत्व दिया जाने लगा। भगवान गणेश पेशवाओं के कुल देवता थे जिसके चलते गणेश चतुर्थी को बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाने लगा। किंतु, पेशवाओं के पराजय के साथ-साथ गणेशूत्सव ने भी अपनी पहचान खोना चालू कर दी थी। अब यह सिर्फ एक निजी त्योहार के रूप में ही परिवारों में मनाया जाता था।

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वर्ष 1893 में, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बाल गंगाधर तिलक ने इस उत्सव का पुन: आयोजन किया। गणेश चतुर्थी को अब न केवल एक उत्सव की तरह देखा जाने लगा पर साथ ही इसके माध्यम से भारतवासीयों के बीच देश की स्वतंत्रता को लेकर जागृत किया जाने लगा। गणेशोत्सव को इस कारण पूरे भारत में पहचान मिली और देशभर में इसे मनाया जाने लगा।

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