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फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए हो रहे थे सेना में भर्ती, ऐसेे आए पकड़ में

कोटद्वार: इन दिनों उत्तराखंड के आला अधिकारियों के फर्जी मोहर व हस्ताक्षर से दलाल धड़ल्ले से प्रमाणपत्र जारी हो रहे हैं। लेकिन शासन को शायद या तो इसकी जानकारी ही नहीं और अगर है तो कोई परवाह नहीं। कोटद्वार में चल रही सेना भर्ती रैली में आये युवाओं से विभिन्न तहसीलों के नाम पर फर्जी मूल, स्थायी निवास प्रमाणपत्र पकड़ में आ रहे हैं, उसे देख सेना के अधिकारी भी हैरत में हैं।फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए हो रहे थे सेना में भर्ती, ऐसेे आए पकड़ में

इस संबंध में जिला प्रशासनों से बात की गई तो वे जानकारी न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं और सेना से लिखित शिकायत न मिलने की बात कह रहे हैं। फर्जी डोमीसाइल के मामले में प्रमुख सचिव सैनिक कल्याण आनंद वर्धन का कहना है कि अभी इस तरह की कोई जानकारी शासन को नहीं मिली है। यह गंभीर मामला है और यदि इस तरह की शिकायत मिलती है तो निश्चित तौर पर मामले की जांच कराई जाएगी। 

पहले रुद्रप्रयाग, फिर चमोली, उसके बाद हरिद्वार और आज देहरादून। कोटद्वार में चल रही गढ़वाल राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर की भर्ती रैली के अंतिम दिन फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर सेना में भर्ती के प्रयास में लगे युवाओं की बाढ़ सी आ गई। रैली के अंतिम दिन फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर भर्ती के प्रयास में जुटे 96 युवा दबोचे गए, जिनमें से करीब तीस युवक दौड़ की बाधा भी पार कर चुके थे।

सेना ने अन्य दिनों की भांति आज भी इन युवाओं को चेतावनी देकर बाहर का रास्ता दिखा दिया, लेकिन प्रशासन की ओर से लगातार चौथे दिन भी यह जानने का प्रयास नहीं किया गया कि आखिर इन युवकों ने उत्तराखंड की विभिन्न तहसीलों के फर्जी प्रमाण पत्र कैसे बना लिए।

 
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