आज भी हर रात इस मंदिर में आती हैं श्री कृष्ण की बुआ, जानें कौन सा है वो मंदिर

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आज भी हमारे देश में ऐसी कई रहस्यमयी जगह हैं, जहां से सच का परदा उठाना बाकी हैं| ऐसी ही आज हम एक ऐसी मंदिर के बारे में बात करेंगे जहां मान्यता हैं की माता कुंती भगवान शिव का पूजन करती हैं| उत्तराखंड के जिला मुख्यालय से करीब-करीब 40 किमी की दूरी पर कस्बा बदोसरा के नजदीक किंतुर गाँव में रहस्यमयी कुंतेश्वर महादेव मंदिर स्थापित हैं| महाभारत से इस अनोखे व अदभूत मंदिर का इतिहास जुड़ा हैं|

पौराणिक मान्यताओ के अनुसार आज भी इस मंदिर में पांडवो की माता और श्री कृष्ण की बुआ कुंती भगवान शिव का पूजन करने आती हैं| माता कुंती शिवलिंग पर जल और पुष्प अर्पित करती हैं| इस सच को जानने के लिए एक न्यूज़ चैनल ने वहाँ के स्थान का निरीक्षण कर कैमरा स्थापित किया परंतु वहाँ के लोक मान्यताओ के अनुसार कैमरा गिर गया पुर तेज रोशनी चारो ओर फैल गयी|

मान्यता

माता कुंती के नाम पर ही इस मंदिर का नाम कुंतेश्वर महादेव मंदिर पड़ा| मान्यता हैं की महाभारत युद्ध के पहले माता कुंती ने अपने पुत्र अर्जुन की मदद से इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर उनके मनपसंद फूल चढ़ाएँ हैं| इससे महादेव प्रसन्न होकर महाभारत युद्ध में पांचों पांडवो के विजयी होने का आर्शीवाद दिया था| तभी से इस मंदिर का नाम कुंतेश्वर महादेव मंदिर पड़ गया|

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पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार जब पांडवों के अज्ञातवास के दौरान भगवान शिव ने माता कुंती को स्वप्न में दर्शन देकर उन्होने स्वर्ण के समान दिखने वाले पुष्पों से अपना अभिषेक करने को कहा| महादेव की इस इच्छा को पूरा करने के लिए कुंती ने अपने पुत्र अर्जुन को ऐसे अदभूत पुष्प लाने को कहा| अर्जुन ने इस बारे में भगवान श्र्री कृष्ण से परामर्श लिया तो, कृष्ण ने अर्जुन को बताया की ऐसे पुष्प देने वाला वृक्ष समुन्द्र मंथन से प्राप्त हुआ था, जो की अब इन्द्रलोक में हैं| अर्जुन ने इंद्रलोक से पारिजात वृक्ष को ले आए|

 

इस वृक्ष के फूल स्वर्ण के समान दिखते थे| इस फूल को माता कुंती ने शिवलिंग पर चढ़ाया था| पारिजात वृक्ष की विशेषता यह हैं की जब फूल वृक्ष पर होते हैं तो ये सफ़ेद रंग के होते हैं परंतु जब ये शाख से अलग होते हैं तो ये स्वर्ण के समान सुनहरे हो जाते हैं| यहाँ के मान्यता अनुसार पारिजात के पुष्प को शिवलिंग पर चढ़ाने पर सारी मनोकामनाएंपूर्ण होती हैं|

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