तो इसलिए आम आदमी नहीं देख सकता हैं किन्नर का अंतिम संस्कार, जान ले इसके पीछे की ये असली वजह…

इस संसार में जो जन्म लेता है उसे एक ना एक दिन मृत्यु को प्राप्त होना ही पडता है। वैसे दुनिया में हर धर्म का अपना-अपना रिवाज होता है। उसी तरह मृत्यु के बाद हर धर्म में मनुष्य के अंतिम संस्कार की अलग-अलग प्रथाएं हैं, कुछ शरीर को दफ़नाते हैं तो कुछ जलाते हैं, लेकिन हमें कुछ ऐसी प्रथाओं के बारे में पता चला है जो बहुत ही अजीब हैं। इनमें से कुछ पहले होती थीं और कुछ अब भी होती हैं। 

नहीं देखना चाहिए किन्नर का अंतिम संस्कार

आज हम आपको किन्नरों के अंतिम संस्कार से जुडी ऐसी ही परम्पराओं के बारें में। किन्नरों का अंतिम संस्कार आम लोगों से अलग होता है।साधारण बात है कि जब आम इंसान का अंतिम संस्कार दिन में दिया जाता है तो किन्नरों का रात के अंधेरे में किया जाता है। इसकी वजह से आम लोग किन्नर का अंतिम संस्कार न देख सके। इसके बारे में कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति किन्नर का अंतिम संस्कार को देखेगा तो वो किन्नर फिर से किन्नर का ही जन्म लेता है।

पहले करते है ये काम

किन्नर के अंतिम संस्कार के पहले मजूद सभी किन्नर मृत किन्नर की डेड बॉडी को जूते चप्पल से भी पीटते हैं। किन्नर ऐसा इसलिए करते हैं ताकि उस जन्म में किए सारे पापों का प्रायश्चित हो सके और वो इंसान दोबारा किन्नर के रूप में दोबारा जन्म न ले।

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