सर्दियों में लीजिये ‘लिट्टी-चोखा’ का मजा, लजीज है ये कहानी

लिट्टी-चोखा  के ठेले नजर आ जाएंगे. वैसे तो यह आमतौर पर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश का खाना है लेकिन आज के समय में यह न सिर्फ देश के अलग-अलग हिस्सों में बल्कि विदेशों में भी झंडे गाड़ रहा है. देखने में साधारण लेकिन स्वाद में उम्दा. साथ ही सेहत के लिए भी भरपूर.

बिहार-यूपी से पहुंचा है
तो जैसा कि मैने बताया कि लिट्टी एक देसी खाना है जो बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आया है. देखने में तो यह ‘बाटी’ जैसा होता है लेकिन इसके इंग्रीडिएंड्स और बनाने का तरीका बिल्कुल अलग होता है. इसमें भरी जाने वाली सत्तू इसकी जान है इसलिए बनाने में बहुत सावधानी रखनी होती 

सत्तू का स्वाद
लिट्टी के अंदर चने के सत्तू से बना मसाला भरा जाता है. इसमें जो मसाले पड़ते हैं वो बिल्कुल ही देसी होते हैं. इसमें मुख्य रूप से आजवाइन, मंगरैल (कलौंजी), लहसुन, अदरख, कटा हुआ धनिया और नींबू डाला जाता है. साथ में थोड़ा सा सरसों का तेल. इस मसाले को लोग हाथ में लेकर भी खाने लगते हैं, पकने से पहले.

लिट्टी का दोस्त है चोखा
चोखा आप कह सकते हैं भर्ता की तरह बनने वाला खाना. इसके लिए टमाटर, बैंगन और आलू को आग पर भूना जाता है और फिर हाथों से मसल कर मिर्च-धनिया आदि डाल कर तैयार कर लिया जाता है. इसे फिर फ्राई नहीं किया जाता है. इसकी सोंधी खुशबू तो भूख ही बढ़ा देती है. हरी चटनी जायका और बढ़ा देती है.

पारंपरिक पकाने का तरीका
पारंपरिक तौर पर इसे गाय के गोबर से बने उपलों पर बनाया जाता है. एक खास आंच पर इसे सेंका जाता है. जब यह पक जाती हैं तो ऊपर से फूटने लगती हैं. फिर इन्हें निकाल कर गमछे में झाड़ा जाता है और घी में डूबोकर चोखे के साथ परोसा जाता है. आजकल स्टोव और बार्बीक्यू टेबल पर भी इसे बनाया जा रहा है.

पौष्टिकता
यह काफी पौष्टिक खाना होता है. इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर और प्रोटीन उपलब्ध होता है. साथ में देसी ताजे मसाले आपके पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं. यही कारण है कि इसे अब मॉरिशस और फीजी जैसे देशों में भी खूब खाया जाता है. साथ ही अब हाई-प्रोफाइल पार्टीज में भी इसका स्टॉल लगा मिलता है.

और भी तरीके
चोखे के अलावा कुछ लोग मांसहार के साथ ही लिट्टी खाते हैं. इसके साथ ही लिट्टी तेल में तल कर भी बनाई जाती है. साइज में उसे सामान्य लिट्टी की तरह ही रखा जाता है लेकिन स्वाद में वो थोड़ी अलग होती है. यही नहीं गांवों में तो बासी लिट्टी की भी खूब मांग होती है.

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