आर्थिक सर्वे: सरकार की सबसे बड़ी आशंका, कच्चा तेल होगा 12% महंगा

आगामी 1 फरवरी को पेश होने वाले मोदी सरकार के आखिरी पूर्ण बजट से पहले सोमवार को आर्थिक सर्वे लोकसभा में पेश किया गया। इसमें सरकार की कई प्रमुख चिंताएं उभरकर सामने आई हैं। यह सर्वे बताता है कि आम बजट 2018 के दौरान बढ़ता क्रूड, बेलगाम होती महंगाई और पर्याप्त संख्या में रोजगार न पैदा होना सरकार की प्रमुख चिंताएं हैं जिसका असर आम बजट 2018 में भी देखने को मिल सकता है। गौरतलब है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली 1 फरवरी 2018 को अपना चौथा पूर्णकालिक आम बजट पेश करेंगे जो कि एनडीए सरकार का भी आखिरी पूर्णकालिक बजट होगा।

आर्थिक सर्वे: सरकार की सबसे बड़ी आशंका, कच्चा तेल होगा 12% महंगा

महंगा क्रूड सरकार की बड़ी चिंता: मौजूदा समय में महंगा होता क्रूड सरकार की प्रमुख चिंता बना हुआ है। सरकार हर हाल में महंगे क्रूड के असर को आम जनता पर कम करना चाहेगी। माना जा रहा है कि क्रूड में इस साल 12 फीसद का इजाफा हो सकता है। वर्तमान समय में WTI क्रूड 66.11 डॉलर प्रति बैरल पर और ब्रेंट क्रूड 70.30 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

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महंगाई के मोर्चे पर भी कम नहीं है चुनौती: महंगाई के मोर्चे पर भी सरकार की मुश्किलें कम नहीं हैं। सरकार को हर हाल में महंगाई को थामने के तेज प्रयास करने होंगे। अगर मुद्रास्फीति मौजूदा स्तरों से नहीं हटती तो नीतिगत दरों को स्थिर रहने की उम्मीद की जा सकती है। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान सीपीआई इन्फ्लेशन 3.7 फीसद के आसपास रह सकती है। आपको बता दें कि जहां एक ओर दिसंबर महीनें में थोक महंगाई ने थोड़ी राहत दी वहीं खुदरा महंगाई का दिसंबर में बढ़ना जारी रहा। दिसंबर महीने में थोक महंगाई दर घटकर 3.58 फीसद के स्तर पर आ गई। नवंबर महीने में यह 3.93 फीसद रही थी। वहीं दूसरी तरफ दिसंबर महीने में सीपीआई इन्फ्लेशन 5.21 फीसद रही है जो कि नवंबर महीने में 4.88 फीसद रही थी। साल 2017 के आखिरी महीने में सीपीआई महंगाई के 5.12 फीसद पर रहने का अनुमान लगाया गया था।

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रोजगार के मोर्चे पर भी कम नहीं है चुनौती: रोजगार के मोर्चे पर भी सरकार को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। लोकसभा चुनाव में प्रचार के दौरान ज्यादा से ज्यादा संख्या में रोजगार मुहैया कराना सरकार के प्रमुख वादों में से एक रहा था। इस बार के आम बजट में सरकार उन योजनाओं के आवंटन में अच्छी वृद्धि कर सकती है जिनसे युवाओं को रोजगार मिलता है। इन योजनाओं में मनरेगा से लेकर पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए चल रही योजनाएं शामिल हैं।

सूत्रों की मानें तो रोजगार सृजित करने वाले कार्यक्रमों का बजट बढ़ना तय है। फिलहाल अलग-अलग मंत्रालयों में करीब आधा दर्जन ऐसी योजनाएं चल रही हैं जिनका सीधा संबंध रोजगार सृजन से है। इन योजनाओं के बजट में बड़ी वृद्धि होने का अनुमान है। वहीं स्वरोजगार उपलब्ध कराने वाले कार्यक्रमों के बजट में भी बड़ी वृद्धि हो सकती है।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और स्टैंड अप इंडिया कार्यक्रम के लिए चालू वित्त वर्ष के बजट में प्रत्येक को 520 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था। इस साल के बजट में इसमें अच्छी वृद्धि की जा सकती है। इसी तरह सरकार श्रम और रोजगार मंत्रलय के अधीन नौकरियों और कौशल प्रशिक्षण तथा कामगारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए आम बजट में वृद्धि कर सकती है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रलय के अधीन चलने वाले प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम का बजट भी बढ़ाकर करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपए किया जा सकता है।

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