भूलकर भी नजरअंदाज ना करे कान का दर्द, वरना हो सकती है परेशानी

कान शरीर का सबसे संवेदनशील अंग भी होता है। कभी-कभी सामान्य से कान दर्द को लोग अनदेखा कर देते हैं, जिससे कान के पर्दों पर गंभीर असर पड़ सकता है और सुनने की क्षमता भी कम हो सकती है। कान से जुड़ी समस्याएं अधिकतर सर्दियों के मौसम में होती हैं। कान बंद होना, कान से पानी आना या सर्दी-बुखार की वजह से ये समस्याएं होती हैं। कई बार बच्चों को भी कान में पस पड़ने जैसी तकलीफें होती हैं, जो एक गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं, इसलिए जरूरी है कि कान का इलाज जल्द से जल्द एक अच्छे डॉक्टर से करा लें।

www.myupchar.com से जुड़े डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला के अनुसार, कई बार कान दर्द बहुत दर्दनाक हो जाता है। यह दर्द सिर और जबड़े तक भी पहुंच जाता है। कान दर्द के अधिकांश मामले संक्रमण के कारण होते हैं। बच्चे और बुजुर्ग इसका अधिक शिकार होते हैं।

विटामिन सी का भरपूर उपयोग

जिन्हें कान की समस्या ज्यादा होती है, उन्हें विटामिन-सी से भरपूर चीजें खानी चाहिए। संतरा, नींबू, पपीता, अमरूद, कीवी और कई ऐसे फल होते हैं, जिनमें विटामिन-सी काफी मात्रा में पाया जाता है। विटामिन सी युक्त पदार्थ से कान के रोग ठीक हो जाते हैं। कान के और भी कई घरेलू इलाज हैं, जिनसे कान की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है आइये जानते हैं-

अदरक का इस्तेमाल

अदरक का रस भी कान के लिए काफी असरदार औषधि है। अदरक के रस की दो बूंदें कान में डालने से कान का दर्द और सूजन कम होती है या फिर अदरक के रस में नींबू का रस मिलाकर इसकी चार-पांच बूंदें कान में डाल लें। थोड़ी देर बाद इसे हल्के हाथ से रूई से साफ कर लें। इससे कान की सफाई तो अच्छी होती है, साथ ही दर्द भी कम हो जाता है।

लहसुन के तेल से उपचार

कान के उपचार के लिए लहसुन से बेहतर आयुर्वेदिक औषधि और कोई नहीं है। 2 चम्मच तेल में लहसुन की कली पीसकर एक बर्तन में गर्म कर लें और इस तेल को ठंडा करने के बाद इसे छानकर एक शीशी में भर लें। इसकी तीन से चार बूंदें कान में डालने से कान के दर्द में राहत मिलती है।

नीम का तेल

नीम का तेल भी आयुर्वेदिक औषधि के रूप में कान के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। नीम के तेल में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो कान की समस्याओं को दूर करने में सहायक होते हैं। नीम के तेल की भी 3 से 4 बूंदें डालने से कान का दर्द ठीक होता है।

प्याज का रस

प्याज का रस निकालकर इसे रूई के फोहे की सहायता से कान में इसकी बूदें टपकाएं। इससे भी कान का दर्द, कान में सूजन या संक्रमण ठीक होता है।

मेथी दाना

मेथी दाना का इस्तेमाल भी कान के लिए एक बेहतर उपचार है। एक चम्मच मेथी दानों को एक बड़े चम्मच तेल में गर्म कर लें, फिर इसे ठंडा करके इस तेल की दो बूंदें कान में डालें। कान के पस के लिए यह एक बेहतर इलाज है।

डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला के अनुसार, नमक और पानी का सेक कान के लिए बहुत फायदेमंद होता है। नमक की छोटी पोटली बना लें और तवे पर गर्म करते हुए सिकाई करें। इसी तरह गर्म पानी को बोतल में भरकर सिकाई करें, कान का दर्द चला जाएगा।

कान की समस्या बार-बार न हो, इसलिए कभी कान में पानी न जाने दें। कान की साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखें। कान में कभी भी नुकीली चीज डालकर सफाई करने का प्रयास न करें, क्योंकि इससे भी कान की समस्या बढ़ सकती है और कान में संक्रमण हो सकता है।

नवजात शिशुओं में खतरा अधिक

www.myupchar.com से जुड़े डॉ. आयुष पाण्डे के अनुसार, नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों में कान का दर्द संक्रमण के कारण होता है। इसे डॉक्टरों की भाषा में ओटाइटिस मीडिया कहा जाता है। बैक्टीरिया, निमोनिया, साइनसाइटिस इसके प्रमुख कारण होते हैं। बच्चों में टीका लगाकर डॉक्टर इसका इलाज करते हैं। ठंड के मौसम में बच्चे की खास देखभाल करें। वहीं उन बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है, जिन्हें सर्दी-जुकाम अधिक होता है। आमतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं और दर्द निवारक दवाओं से इसका इलाज किया जाता है। कान से तरल का स्राव होने पर इलाज जटिल हो जाता है। सर्जरी भी करना पड़ सकती है। इस स्थिति से बचना है तो उपरोक्त सावधानियां बरतें।

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