रांची जिला के खलारी में श्री जानकी रमण मंदिर में 73 वर्षों से हो रही दुर्गा पूजा, बंगालियों ने ही की थी शुरुआत

रांची जिला के खलारी में श्री जानकी रमण मंदिर में दुर्गा पूजा का इस वर्ष 73वां वर्षगांठ है। खलारी में वर्ष 1936 में एसीसी सीमेंट कंपनी की स्थापना के बाद इस कंपनी में काम करने वाले कुछ बांग्ला परिवारों ने ही खलारी में दुर्गा पूजा की शुरुआत की थी। अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्य कमलाकांत मिश्र बताते हैं कि पहली बार 1950 के शुरुआती दशक में दुर्गा पूजा एसीसी क्लब में आयोजित किया गया था।

सीमेंट कामगार रामकृष्ण घोष की अगुआई में एमएन घोष आदि बांग्ला समुदाय के लोगों ने बढ़-चढ़कर आयोजन में भाग लिया था। मिश्र बताते हैं कि पहली बार बांकुड़ा (पश्चिम बंगाल) से एक संभ्रांत परिवार से पुजारी दुर्गा पूजा करने आए थे। कुछ वर्ष तक क्लब में आयोजन के बाद एसीसी मिडि‍ल स्कूल में दुर्गा पूजा के आयोजन को स्थानान्तरित कर दिया गया। तब क्लब मैदान में ही पूजा के दौरान मेला भी लगता था।

इस दौरान श्री जानकी रमण मंदिर का निर्माण भी हो चुका था। हंसनाथ पांडेय इस मंदिर के पहले पुजारी थे। बाद में कमलाकांत मिश्र के पिता पुरणानंद मिश्र इस मंदिर के पुजारी बने, जो मृत्यु पर्यन्त मंदिर के पुजारी बने रहे। वर्ष 1965 में श्रीजानकी रमण मंदिर में दुर्गा पूजा के लिए स्थायी मंडप बना। इसके बाद से एसीसी स्कूल से स्थानान्तरित कर दुर्गा पूजा आयोजन को जानकी रमण मंदिर ले आया गया। तब से लगातार इसी जगह पूजा का आयोजन होता आ रहा है।

श्री जानकी रमण मंदिर के पुनर्निर्माण के दौरान मां दुर्गा का स्थायी मंडप भी भव्य बना दिया गया है। इस वर्ष मंदिर के विशाल प्रांगण में टाइल्स लगाने का कार्य अंतिम चरण में है। आरंभ के दिनों में बांग्ला परिवारों ने आपसी सहयोग से पूजा शुरू की थी। लेकिन आज श्री जानकी रमण मंदिर व यहां का दुर्गा पूजा सार्वजनिक है। दुर्गा पूजा के लिए पुजारी आज भी बंगाल से ही आते हैं।

प्रत्येक वर्ष मंदिर के बाहर बड़ा मेला लगता था। परंतु कोविड के सरकारी निर्देश के कारण इस वर्ष भी मेला स्थगित कर दिया गया है। कोविड प्रोटोकॉल के कारण पंडाल व प्रतिमा का आकार, साज सज्जा पर भी असर पड़ा है। हालांकि श्रद्धालुओं के श्रद्धा व उत्साह में कोई कमी नहीं है।

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