पीने का पानी आपको 40 खतनाक बीमारियों से बचाता है; जानें कैसे?

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क्या आप या आपके किसी परिचित के सिर के बाल समय से पहले ही सफेद हो गए हैं? क्या कम उम्र में ही बुढ़ापे के लक्षण दिख रहे हैं? क्या उनकी हड्डियों में विकृति आ रही है या वह टेढ़ी हो रही हैं? अगर इन प्रश्नों में से किसी का भी जवाब हां में है तो आप इसकी वजह जरूर जानना चाहेंगे।

पीने का पानी आपको 40 खतनाक बीमारियों से बचाता है; जानें कैसे?

आपके जानने वाले, परिचित, रिश्तेदार और यहां तक कि आस-पड़ोस के लोग भी आपको कई तरह के सुझाव देंगे। कई लोग इसका कारण बताते हुए ऐसे-ऐसे उपाय बताएंगे जो शायद आप कर भी न पाएं। एक कारण हम आपको बता रहे हैं। हो सकता है यही वह कारण हो जिसने आपकी रातों की नींद उड़ा रखी हो। हम यहां आपको इस तरह की परेशानियों से बचने के उपाय भी बताएंगे।

पानी है आपकी समस्याओं की जड़

संभवत: आपकी समस्याओं की जड़ वह पानी ही है, जिसे आप पीते हैं। जिससे आप खाना पकाते हैं और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी की हर जरूरत में इस्तेमाल करते हैं। हो सकता है पानी के बारे में भी आपको किसी ने कहा हो, लेकिन यहां हम आपको उदाहरण सहित बता रहे हैं कि कौन सा पानी आपको ऐसी बीमारियां दे रहा है और आप इससे कैसे बच सकते हैं।

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बुढ़ापा बांट रहा डीप बोरिंग का पानी

शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी पानी की सप्लाई में खामियों के चलते हम और आप जमीन में डीप बोरिंग करके जहां भू-गर्भ जल स्तर को प्रभावित कर रहे हैं, वहीं अब इससे समय से पहले बुढ़ापा भी आ रहा है। टीएमबीयू पीजी भूगोल विभाग के हालिया शोध में यह बात सामने आई है।

बिहार में भागलपुर शहर के पांच अलग-अलग क्षेत्रों में हुए एक शोध के बाद जो तथ्य एकत्रित किए गए हैं, वह चौंकाने वाले हैं। 150 फीट से नीचे पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होती है। इससे दांत पीले होने के साथ-साथ हड्डियों में ढेढ़ापन जैसी बीमारी बढ़ रही और लोग जल्द बुढ़ापे के शिकार हो रहे हैं।

क्यों बढ़ रहा है खतरा

शोधकर्ता डॉ. एसएन पांडेय ने बताया कि भागलपुर के शहरी क्षेत्र के भूगर्भ में रूपांतरित चट्टानें हैं जो नाइस कहलाती हैं। नाइस जमीन के नीचे काफी गहराई तक फैली हैं, जिसके काले हिस्से में फ्लोराइड रहता है। जिस भूगर्भ जल का उपयोग हमलोग रोजमर्रा के कार्यों के लिए करते हैं, वह भी वर्षा जल ही है। वर्षा जल भूगर्भ में 150 फीट की गहराई तक पहुंचता है। यह भूगर्भ में फ्लोराइड के प्रभाव को कम या संतुलित करता है। यही वजह है कि इतनी गहराई वाले जल से बीमारी का खतरा नहीं रहता है।

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