पटना के इन युवाओं के संकल्प से स्लम बस्तियों में सपनों ने भरी उड़ान

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पटना। रोज शाम पांच बजते ही एनआइटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) कैंपस के विद्यार्थी शिक्षक की भूमिका में आ जाते हैं। ये उन परिवारों के बच्चों को तालीम की दुनिया में ले जाते हैं जो गरीबी के कारण महंगी कोचिंग कर प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी नहीं कर सकते।स्लम बस्तियों में शिक्षा की ये लौ एनआइटी के विद्यार्थियों के ‘संकल्प’ की बदौलत रोशन हो रही है। वे गुदड़ी के लालों के भविष्य को संवारने के संकल्प के साथ उनकी मेधा तराश इंजीनियर बना रहे हैं। पटना के इन युवाओं के संकल्प से स्लम बस्तियों में सपनों ने भरी उड़ान

आइआइटी तक में हो रहे सफल  

एनआइटी परिसर में चलने वाली ‘संकल्प’ की कक्षा में पढ़कर निकल रहे ‘गुदड़ी के लाल’ हर साल जवाहर नवोदय विद्यालय, सिमुलतला आवासीय विद्यालय, सैनिक स्कूल आदि की प्रवेश परीक्षाओं में सफल हो रहे हैं।

 प्रथम बैच (2007) के विद्यार्थी आशीष सुमन 2016 में जेईई एडवांस में सफल होकर आइआइटी मुंबई में पढ़ाई कर रहे हैं। आशीष के शब्दों में ‘संकल्प’ में पढ़ाया नहीं जाता है, बल्कि पढऩे को प्रेरित किया जाता है। इस साल मैट्रिक में छह विद्यार्थियों को साइंस और मैथ में 100 में 100 अंक मिले हैं। 

एक दशक सें जारी है सफर

एनआइटी, पटना में सामाजिक दायित्व के तहत एनएसएस से जुड़े विद्यार्थियों ने 2007 में ‘संकल्प घर-घर शिक्षा का’ स्थापित किया था। इसका उद्देश्य स्लम में रहने वाले गरीब बच्चों के बेहतर शिक्षा मुहैया करना है। सोमवार से शनिवार तक प्रतिदिन शाम पांच बजे कक्षा प्रारंभ हो जाती है और सात बजे तक एनआइटी के विद्यार्थी उन्हें पढ़ाते हैं। कक्षा एक से 10 तक के लिए अलग-अलग बैच में पढ़ाई होती है। औसतन 350 बच्चे हर साल संकल्प से जुड़कर शिक्षित हो रहे हैं। 

बच्चे अंग्रेजी बोलेंगे, सोचा न था

पटना के गुलबी घाट के रहने वाले रामप्रवेश राम का कहना है कि बच्चे अंग्रेजी में बात करेंगे, इसकी कल्पना भी नहीं करते थे। ‘संकल्प’ ने दो बेटे और बेटियों की जिंदगी संवार दी। पिछले छह साल से उनके बच्चे नियमित ‘संकल्प’ में पढ़ाई कर रहे हैं।

अंग्रेजी में बात करते और चुटकी में गणित के प्रश्नों को हल करते देख रामप्रवेश और उनकी पत्नी एनआइटी के विद्यार्थियों को दुआ देते हैं। आसपास के स्लम में रहने वाले ऐसे तमाम परिवार हैं जिन्हें ‘संकल्प’ ने शिक्षा की लौ से रोशन किया है। महेंद्रू के दीपक प्रसाद के बच्चे यहां पढ़ाई करने के बाद नवोदय विद्यालय में पहुंच गए हैं। 

पठन-पाठन सामग्री नि:शुल्क 

संकल्प से हर साल 200 एनआइटी के विद्यार्थी जुड़ते हैं। सभी को सप्ताह में एक-दो या उनकी इच्छा पर अधिक कक्षाएं आवंटित की जाती हैं। संयोजक ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि एनआइटी के बच्चे फंड जमा कर बच्चों को पठन-पाठन सामग्री मुफ्त उपलब्ध कराते हैं। प्रत्येक छात्र प्रति सेमेस्टर 200 रुपये का योगदान पॉकेट मनी से करते हैं। पूर्ववर्ती छात्र और शिक्षक भी डोनेशन देते हैं। बच्चों को डे्रस आदि उपलब्ध कराने के लिए पेंटिंग, डे्रस मेकिंग आदि प्रतियोगिताओं से मिली राशि को भी डोनेट करते हैं। 

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