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इस जंगल में जाने से नहीं लगेगा डर, जाने क्या है इसमें खास…

चंडीगढ़। जंगल का नाम सुनते ही जहन में शेर-चीता जैसे जंगली जानवर आते हैं। उनसे डरकर कोई वहां नहीं जाना चाहिए, पर चंडीगढ़ के इस जंगल में हर कोई जाना चाहता है। वहां घूमना चाहता है। पेड़ों से, हवाओं से बातें करना चाहता है। वहां रहना चाहता है। पत्थरों का शहर कहे जाने वाले चंडीगढ़ के लाखों लोगों को सिटी फॉरेस्ट के रूप में शहर एक नया टूरिस्ट स्पॉट मिल गया है। शहर से दूर बिना किसी रोक-टोक व शोरगुल से दूर वहां जाकर सैर कर पाएंगे। 

यहां वॉक करने के लिए 8 किलोमीटर वॉकिंग ट्रैक, बच्चों के लिए चिल्ड्रंस पार्क में लगे कई तरह के झूले, बड़ों के लिए ओपन एयर जिम और शांत चित के लिए बैठने की उपयुक्त व्यवस्था सब कुछ है। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने सांसद किरण खेर की मौजूदगी में इस फॉरेस्ट को शहर को समर्पित किया। उद्घाटन के बाद प्रशासक ने रेन शेल्टर तक खुद गोल्फ कार्ट भी चलाई।

सांसद किरण खेर भी उनके साथ गोल्फ कार्ट में बैठी। यहां न तो वाहनों का शोर व धुआं है और न ही कंक्रीट के वह जंगल जो जिंदगी में तनाव और सांसों में जहर घोल रहे हैं। फॉरेस्ट एंड वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट ने भारत सरकार की नगर वन उद्यन योजना के तहत 100 हेक्टेयर जंगल एरिया में 2 करोड़ की लागत से इसे बनाया है। सप्ताह के काम के बोझ से होने वाले तनाव को इस शांत जंगल में कुछ पल बिताकर दूर किया जा सकता है।

सबसे अच्छी बात तो यह है कि सुखना लेक और रॉक गार्डन से महज कुछ कदमों की दूरी पर इसे बनाया गया है। सुखना लेक और रॉक गार्डन में पर्यटकों की बड़ी भीड़ रहती है। सिटी फॉरेस्ट इनके उलट ऐसी जगह होगी जहां शांति होगी। यहां सूखे पेड़ों के तने पर आर्ट वर्क कर खूबसूरत आकृतियां बनाई गई हैं। बैठने के लिए सीट और टेबल भी इसी तने से बनी हैं।

बर्ड सेंक्चुरी भी बनाई जाए

वीपी सिंह बदनौर ने रॉक गार्डन और सुखना लेक के बीच बनाए गए सिटी फॉरेस्ट के उद्घाटन पर उन्होंने कहा कि बर्ड सेंचुरी के लिए यह बहुत अच्छी जगह है। इसको स्थापित करने का प्रयास होना चाहिए। इस शांत वातावरण में पक्षियों की चहचहाहट सुकून का अनुभव देगी। उन्होंने सिटी फॉरेस्ट को देखकर जमकर तारीफ की। उन्होंने फॉरेस्ट के कुछ हिस्से में बर्ड सेंचुरी बनाने की संभावनाएं तलाशने के आदेश दिए। इससे संबंधित लोगों से उनकी मीटिंग करवाने को भी कहा। प्रशासक ने चंडीगढ़ बर्ड क्लब के सदस्यों से भी बर्ड सेंचुरी बनाने में सहयोग मांगा।

बर्ड सेंचुरी बन गई तो सिटी में हो जाएंगी तीन

सेक्टर-21 में बर्ड सेंक्चुरी है। उसमें विभिन्न किस्मों के तोते रहते हैं। सुखना वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी भी है। बर्ड सेंक्चुरी शहर की तीसरी सेंक्चुरी होगी। सिटी फॉरेस्ट तीन महीने से तैयार था, लेकिन प्रशासक का समय उद्घाटन के लिए नहीं मिल रहा था।

जिस गंदे पानी ने बर्बाद किया, वहीं कर रहा आबाद

कांसल के गंदे पानी ने स्मृति उपवन के सभी हरे-भरे पेड़ों को डेड ट्री के जंगल में बदल दिया था। सभी पेड़ सूख गए थे और दूर तक बदबू फैली रहती थी। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने पारंपरिक आर्गेनिक मैथड के जरिए बायो ट्रीटमेंट सीवरेज वाटर से पराली और भूसे से पाथ बनाकर इस पानी को साफ किया। ट्रीटमेंट से पहले इस पानी का बीओडी लेवल 70-80 मेगा ग्राम होता था, जो ट्रीटमेंट के बाद घटकर 7-11 मेगाग्राम रह गया।

सीओडी लेवल 200-210 से कम होकर 27-32 मेगाग्राम रह गया है। अब यही पानी वाटर बॉडी से सिटी फॉरेस्ट की शोभा बढ़ा रहा है। साथ ही पेड़ पौधों के काम आ रहा है। स्मृति उपवन बनाने का उद्देश्य यह था कि लोग अपनों की याद में यहां पौधा लगा सकें। इस दौरान बहुत से पौधे पेड़ बने। पर सीवरेज के गंदे पानी ने हरे-भरे पेड़ों को खत्म कर दिया।

प्रकृति के प्रति लगाव भी बढ़ेगा

  • पौधों और बायोडायवर्सिटी के प्रति जागरुकता बढ़ेगी।
  • पर्यटकों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की जानकारी मिलेगी।
  • चंडीगढ़ रीजन की महत्वपूर्ण वनस्पतियों और जीवों की जानकारी मिलेगी।

स्वच्छ वायु, शोर कम करना, वाटर हार्वेस्टिंग और तापमान को कम करेगी फॉरेस्ट संबंधी रिसर्च।

ये सभी सुविधाएं

  • वॉक-वे/ जॉगिंग ट्रेलस/ नेचर ट्रेलस
  • शैलो वॉटर बॉडीविजिटर्स
  • शेड/ रेनशेल्टर
  • मेडिटेशन हट
  • ओपन एयर जिम
  • चिल्ड्रंस पार्क
  • पब्लिक कन्वीनियंस

बड्र्स ऑफ चंडीगढ़ से पहचानें पक्षी

प्रशासक ने बड्र्स ऑफ चंडीगढ़ बुक को भी लांच किया। इस बुक को फॉरेस्ट एंड वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट ने चंडीगढ़ बर्ड क्लब के सहयोग से तैयार किया है। इस बुक के जरिए कोई भी बर्ड वॉचर या आम व्यक्ति चंडीगढ़ के और यहां आने वाले माइग्रेटरी बड्र्स की पहचान कर सकता है। साथ ही उनकी विविधता और खान-पान पनपने की जानकारी भी ले सकता है।

चंडीगढ़ ग्रीनिंग एक्शन प्लान

गर्वनर ने 2018-19 के लिए ग्रीनिंग चंडीगढ़ एक्शन प्लान भी इस मौके पर लांच किया गया। प्लान के मुताबिक सालभर में 2 लाख 43 हजार पौधे लगाए जाएंगे। पिछले साल 2 लाख 39 हजार 126 पौधे लगाए गए थे।

एडवाइजर का नाम नहीं होने से भड़की किरण खेर

उद्घाटन पट्ट पर एडवाइजर परिमल राय का नाम नहीं होने से किरण खेर भड़क गईं। उन्होंने चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट संतोष कुमार से इसका कारण पूछा। पट्ट पर प्रशासक वीपी सिंह बदनौर, सांसद किरण खेर, होम कम फॉरेस्ट सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल के साथ चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट संतोष कुमार का नाम था। किरण खेर ने कहा कि एडवाइजर का भी होना चाहिए था।

ब्रांडेड कॉफी कप की चुटकी

जंगल में महंगे ब्रांड के कप में कॉफी परोसे जाने पर खुसफुसाहट शुरू हो गई। सबसे पहले सांसद किरण खेर ने ही पूछ लिया यह कप तो लूई विटन के हैं न। इसके बाद एडवाइजर परिमल राय ने भी चुटकी लेते हुए होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल से पूछा कि यह कप आप कहां से आए।

चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट संतोष कुमार ने जवाब दिया कि वह बाद में बताएंगे। ऐसे में इशारों ही इशारों में एक-दूसरे की तरफ देख सब मुस्कुराते भी दिखे। खुद डिस्पोजेबल कप में कॉफी की चुस्कियां लेते एडवाइजर ने कहा कि कप चाहे ब्रांड का हो या डिस्पोजेबल टेस्ट तो कॉफी ही देती है। दोनों में कॉफी एक जैसी ही लगती है। 

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