अंकल-आंटी के कल्चर ने देश को बर्बाद किया: दिनेश शर्मा

बच्चों के जन्मदिन पर केक काटना भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं हो सकता। बर्थडे मोमबत्तियां बुझाकर मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में ऐसा प्रावधान नहीं है। इसमें दीपक जलाकर जन्मदिन की बधाई दी जाती है। आज पश्चिमी देश भारत की संस्कृति, सभ्यता का अनुसरण कर रहे हैं लेकिन हम पश्चिमी संस्कृति में रंगते जा रहे हैं। अंकल-आंटी के कल्चर से देश बर्बाद हो रहा है।
यह कहना है कि यूपी के उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा का। वह गोरखनाथ मंदिर में महंत दिग्विजयनाथ और अवेद्यनाथ पुण्यतिथि पर शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बर्थडे पर केक को टुकड़ों में काटा और उसे बांटा जाता है, वैसा पश्चिमी देशों में होता है।
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भारतीय संस्कृति में बूंदी के लड्डू बनाए जाते थे। सबका मुंह मीठा कराके आशीर्वाद लिया जाता था। यही अंतर हमारी और पाश्चात्य संस्कृति में है। पाश्चात्य संस्कृति जहां बांटने का काम करती है वहीं भारतीय संस्कृति सबको एकजुट होकर रहने का संदेश देती है। यही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का मूल मंत्र है।
उन्होंने भारतीय शिक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय भारत में थे। वहां दुनिया के लोग शिक्षा ग्रहण करने आते थे। यहां गुरुकुल की परंपरा रही है। सब लोग साथ शिक्षा ग्रहण करते थे। यहां संस्कारयुक्त शिक्षा मिलती थी। किसी के साथ भेदभाव नहीं था पर अब वह बात नहीं रही।





