दिल्ली में हटा कॉरिडोर जबकि 43 में से 26 स्टैंडर्ड्स पर पास था, जयपुर में 39 पैमानों पर फेल

जयपुर/दिल्ली. देश में दिल्ली ही एकमात्र ऐसा शहर है जिसने आठ साल तक इस्तेमाल के बाद बीआरटीएस कॉरिडोर हटा दिया। नतीजा…कॉरिडोर हटने के बाद इस क्षेत्र में ट्रैफिक जाम 40% तक कम हुए हैं, हादसों में भी 63% तक कमी आई है। जुलाई, 2012 में सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट ने एक अध्ययन के बाद कहा था कि दिल्ली बिना बीआरटीएस के बेहतर है। इस अध्ययन के आधार पर ही 2015 में कॉरिडोर हटाने का निर्णय हुआ था। 
दिल्ली में हटा कॉरिडोर जबकि 43 में से 26 स्टैंडर्ड्स पर पास था, जयपुर में 39 पैमानों पर फेल

जयपुर के कॉरिडोर 39 पैमानों पर फेल….

दिल्ली की तरह जयपुर में बीआरटीएस पर गंभीर अध्ययन हो नहीं रहे, और हो भी रहे हैं तो जिम्मेदार इन पर ध्यान ही नहीं देते।  वर्ल्ड रिसोर्सेज़ इंस्टीट्यूट (डब्ल्यूआरआई) के 43 तय पैमानों पर बीआरटीएस की जांच अपने एक्सपर्ट पैनल से करवाई तो जयपुर के कॉरिडोर 39 पैमानों पर फेल हो गए।
डब्ल्यूआरआई ने ही 2009 में दिल्ली बीआरटीएस की खामियां गिनाईं थी। हालांकि तब दिल्ली बीआरटीएस भी 43 में से 26 पैमानों पर पास हो गया था। विडंबना ये है कि 2016 में न्यू सांगानेर रोड कॉरिडोर के जेडीए के सेफ्टी ऑडिट में भी विशेषज्ञों ने कॉरिडोर को इंजीनियरिंग का फॉल्ट बताते हुए 11 चौराहों की पहचान की थी जहां खामियों की भरमार है। मगर रिपोर्ट को जिम्मेदारों ने ठंडे बस्ते में डाल दिया।

हमारे 8.5 किमी के कॉरिडोर में निकले हादसों के 11 प्वाइंट

न्यू सांगानेर रोड बीआरटीएस कॉरिडोर के जेडीए के 2016 में हुए सेफ्टी ऑडिट में सामने आया कि 11 चौराहे और प्वाइंट ऐसे हैं जो हादसों का सबब बन रहे हैं।

ये हैं 11 खतरनाक चौराहे

– भृगु पथ 
– बी-2 बाईपास 
– मुहाना मंडी चौराहा 
– विजय पथ
– पटेल मार्ग 
– स्वर्ण पथ 
– रजत पथ 
– वीटी रोड 
– शनि मंदिर 
– सी-जोन बाईपास 
– किसान धर्म कांटा

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…और ये हैं इन प्वाइंट पर खामियां

– इन चौराहों का आकार बहुत बड़ा है। इन्हें छोटा करने की जरूरत है। 
– यहां ट्रैफिक लाइट्स सुधारने की जरूरत है ताकि टू-व्हीलर आसानी से निकल सकें।

लागू नहीं हुए सुधार…ये तीन अधिकारी थे जिम्मेदार

1. विवेक शर्मा, एक्सईएन
2. राजकुमार शर्मा, एडिशनल चीफ रहे 
3. एनसी माथुर, निदेशक इंजीनियर
सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट आने के बावजूद इसमें जिन सुधारों की सिफारिश की गई वो लागू ही नहीं हुए। जिम्मेदारी तीन अफसरों पर थी। दैनिक भास्कर ने तीनों से सवाल पूछा-हादसे होते रहे…फिर भी आपने सुधार क्यों नहीं लागू किए। जवाब हैरान करने वाला है…

अधिकारी बोले-चौराहों में कमी नहीं…लोगों में ट्रैफिक सेंस कम

लोग ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर रहे। सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट ट्रैफिक पुलिस को भेज राय मांगी थी, जो उन्होंने नहीं भेजी। रिपोर्ट में चौराहों को छोटा करने की बात संभवतया ठीक नहीं थी… अलग से अध्ययन की जरूरत है।

नतीजा…हर महीने हादसों में हो रही है औसतन दो की मौत

– 135 हादसे हुए कॉरिडोर में पिछले 19 महीने में
– 40 लोगों की हादसों में मौत, 130 हुए घायल

एक्सपर्ट पैनल

– बीजी शर्मा, रिटायर्ड सेक्रेट्री, पीडब्ल्यूडी
– एसएल माथुर, रिटायर्ड चीफ इंजीनियर पीडब्ल्यूडी और डायरेक्टर इंजीनियर
– पीएन मेंदोला, सचिव लोक संपत्ति संरक्षण समिति
– सुरेश चंद शर्मा, केंद्र में सुपरिंटेंडिंग सर्वेयर रहे
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