वर्ष के कुछ ऐसे दिन जब जरुर बनाने चाहिए यौन सम्बन्ध

- in जीवनशैली

विवाह के बाद अक्सर यह सोचा जाता है कि स्त्री-पुरुष कभी भी, किसी भी वक्त, जब मन में कामेच्छा जागृत हो तभी अपने जीवनसाथी के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना सकता है और अपनी जागृत कामेच्छा की पूर्ति कर सकता है। यह सही है। अक्सर ऐसा होता भी है। स्त्री-पुरुष के बीच पारस्परिक आकर्षण सृष्टि का एक अटल सत्य है। सृष्टि की रचना ही इस आकर्षण पर हुई है। वैसे तो कभी-भी किसी भी दिन और समय पर आप अपने साथी के साथ आत्मिक मिलन की इस घड़ी को जी सकते हैं लेकिन फिर भी कुछ समय या यूं कहें कुछ ऐसे दिन होते हैं जब आप इस सम्बन्ध को बनाए तो वह आपके जीवन में खुशियों की बहार ला सकते हैं। आइए डालते हैं कुछ ऐसे दिनों पर नजर जिन पर आपको अपने साथी के साथ अवश्य ही सम्बन्ध बनाने चाहिए—

* अमावस्या की पूर्व रात्रि

बड़े बुजुर्गों से सुना और शास्त्रों में कहा गया है कि नवविवाहित जोड़े को अमावस्या के दिन एक दूसरे के साथ यौन सम्बन्ध नहीं बनाने चाहिए। कहा जाता है यह रात्रि पाश्विक आत्माओं के मिलन की रात होती है। इस दिन ऐसा करने से उनके वैवाहिक जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। लेकिन यदि आप अमावस्या की पूर्व रात्रि अर्थात् एक दिन पूर्व अपने साथी के साथ यौन सम्बन्ध बनाते हैं तो वह आपके लिए फलदायी होता है। पंडितों और पुजारियों का कहना है कि इस दिन बनाए गए सम्बन्ध से उत्पन्न सन्तान भाग्यशाली होती है। हालांकि इन बातों पर यकीन करना बड़ा मुश्किल है, क्योंकि आम जीवन में व्यक्ति को इस बात का ध्यान ही नहीं रहता कि वह कब और किस दिन अपने साथी के साथ यौन सम्बन्ध बना रहा है।

* लोहड़ी

भारत में लोहड़ी पर्व का अपना एक स्थान है। वैसे तो यह पंजाबी समुदाय का पर्व है, लेकिन वर्तमान में इसे अन्य लोग भी बड़े उत्साव के साथ मनाते हैं। इस दिन नई फसल के कटने की खुशी के साथ मांगलिक कार्यों की शुरूआत होती है। कहा जाता है पंजाबी समुदाय इस विशेष दिन अपने साथी के साथ यौन सम्बन्ध बनाता है। उनका मानना है कि इस रात्रि को हुआ मिलाप हमेशा शुभ होता है।

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गुरुवार

पुराणों में कहा गया है कि गुरुवार के दिन बनाए गए यौन सम्बन्धों से उत्पन्न होने वाली संतान महाज्ञानी होती है। गुरुवार सरस्वती का दिन माना जाता है। वैसे भी कहा जाता है सप्ताह के मध्य का यह दिन हर प्रकार से श्रेष्ठ होता है। व्यक्ति अपने कार्य के चरमोत्कर्ष पर होता है, क्योंकि उसके बाद आने वाले दिन ढीले और सुस्त और आराम के माने जाते हैं। ऐसे में जहाँ गुरुवार को व्यक्ति अपनी दिनचर्या के शिखर पर होता है, वहीं वह इस रात्रि को अपने साथी के साथ यौन सम्बन्ध बनाते वक्त भी शिखर पर होता है। तीव्र कामेच्छा जागृत होती है, यह तभी पूरी होती है जब वह साथी के साथ अपने सम्बन्धों के चरमोत्कर्ष पर होता है।

* पूर्णिमा की रात से पहले

अक्सर यह कहा जाता है कि महिलाएँ पूर्णिमा की रात या उसके बाद माहवारी में आती हैं। हालांकि यह बात सभी महिलाओं पर लागू नहीं होती है। ऐसे में स्त्री अपने साथी के साथ पूर्णिमा की रात से पहले ही एकाकार होना पसन्द करती है। कहा जाता है कि पूर्णिमा की रात से पहले पडऩे वाली चन्द्र किरणें महिलाओं में यौन इच्छा की भावना पैदा करती हैं, जिसके चलते स्त्री शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए उतावली हो जाती है। ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन बनाए गए सम्बन्धों से उत्पन्न होने वाली संतान शालीन, धैर्यवान और ज्ञानी होती है।

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