दुष्कर्म के आरोपी दाती महाराज को मुश्किलें ने घेरा, अब CBI करेगी मामले की जांच

राजस्थान की रहने वाली 25 साल की युवती से दुष्कर्म के आरोप में घिरे दाती महाराज की मुश्किलें बढ़ने जा रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान दुष्कर्म आरोपी दाती महाराज को झटका देते हुए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच से मामले को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) को सौंप दिया है।
युवती का आरोप है कि 25, 26 और 27 मार्च 2016 को उसके साथ दाती महाराज और उसके सहयोगियों ने यहीं सामूहिक दुष्कर्म किया था। राजस्थान की निवासी एक 25 वर्षीय युवती ने स्वयंभू बाबा दाती महाराज और उसके चेलों पर उसके साथ बार-बार सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया है। इनमें दाती महाराज के तीन भाई भी हैं।
इससे पहले एक अक्टूबर को दुष्कर्म के आरोपी शनिधाम मंदिर के संस्थापक दाती महाराज (असली नाम मदन लाल) के खिलाफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने साकेत कोर्ट में आईपीसी की धारा 376 और 377 के तहत केस में चार्जशीट दायर की। दाती महाराज को बिना गिरफ्तार किए ही ये चार्जशीट दाखिल की गई है। दाती और उसके तीन सौतेले भाइयों का नाम चार्जशीट के कॉलम नंबर 11 में आरोपी के तैर पर रखा गया है।
नहीं मिले पर्याप्त सबूत
क्राइम ब्रांच सूत्रों के मुताबिक, पीड़िता ने पाली आश्रम में जिन तीन तारीखों पर उसके दुष्कर्म होने की एफआइआर दर्ज कराई थी, उसमें से एक तारीख को लड़की पाली में मौजूद नहीं थी बल्कि अजमेर में अपने कॉलेज में मौजूद थी जिसके सबूत कॉलेज में पीड़िता की हाजिरी से पता लगे हैं। वही, दिल्ली आश्रम में जिस तारीख को दाती पर पीड़िता ने दुष्कर्म का आरोप लगाया था उस दिन शनि अमावस्या थी और दाती भस्म लगाकर पूजा हवन में शामिल था और सैकड़ों की तादात में पीड़िता सहित आश्रम की अन्य लड़कियां और अनुयायी भी मौजूद थे। उस दिन भी कोई ऐसा सबूत पुलिस को नहीं मिला जो ये साबित करे की पीड़िता के साथ दाती के जोर जबरदस्ती की थी।
गिरफ्तार किए बिना आरोप पत्र दाखिल
इससे पहले माना जा रहा था कि दुष्कर्म के आरोपी शनिधाम मंदिर के संस्थापक दाती महाराज व उसके तीन सौतेले भाइयों अनिल, अशोक व अर्जुन को क्राइम ब्रांच गिरफ्तार किए बिना आरोप पत्र दाखिल करेगी। इसकी वजह इनके खिलाफ दुष्कर्म के ठोस सबूत नहीं मिलना बताया गया था।
कई बार हो चुकी है पूछताछ
तीन माह पहले 10 जून को फतेहपुर बेरी थाने में मुकदमा दर्ज होने के अगले दिन पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक ने केस को क्राइम ब्रांच में स्थानांतरित कर दिया था। क्राइम ब्रांच ने युवती और उनके परिजनों से पूछताछ के साथ जांच शुरू की थी। दाती से आठ बार और उसके सौतेले भाइयों से भी कई बार पूछताछ की गई।
10 साल पहले पढ़ाई के लिए आई थी आश्रम
पीड़ित युवती राजस्थान में परिवार के साथ रहती है। उसके परिजन ने करीब 10 साल पहले उसे पढ़ाई के लिए राजस्थान के पाली स्थित दाती महाराज के बालाग्राम गुरुकुल आश्रम में भेज दिया था। बाद में उसे दिल्ली के छतरपुर स्थित आश्रम में भेज दिया गया।
शिकायत में युवती ने कहा है कि करीब दो साल पहले दाती महाराज ने छतरपुर स्थित शनिधाम मंदिर के आश्रम में उसके साथ पहली बार दुष्कर्म किया था। बाद में उसके दो शिष्यों ने भी उसके साथ आश्रम में कई बार दुष्कर्म किया था। राजस्थान स्थित आश्रम में भी उसके साथ तीनों ने कई बार दुष्कर्म किया था।
एक बार सीबीआइ जांच की याचिका हो चुकी है खारिज
यहां पर बता दें कि इससे पहले सिटीजन फोरम फॉर सिविल राइट्स (एनजीओ) ने याचिका दायर कर 25 वर्षीय युवती से दुष्कर्म के मामले में पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए सीबीआइ से जांच कराने की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि दाती महाराज की गिरफ्तारी न होने से गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है और सबूत नष्ट किए जा सकते हैं। हालांकि, हाई कोर्ट ने 11 जुलाई को इस याचिका को ठुकरा दिया था। तब जस्टिस मुक्ता गुप्ता की पीठ ने कहा था कि याचिकाकर्ता गैर सरकारी संस्था मामले में पीड़ित नहीं है। इससे एनजीओ का कोई मतलब नहीं है। अगर पीड़ित और आरोपित इस संबंध में याचिका दायर करे तो विचार किया जाएगा।





