रामायण में हनुमान का रोल निभाने वाले दारा सिंह खाते थे सिर्फ पूरे दिन में 100 बादाम

रामानंद सागर की रामायण के महानायक, महाबलि रामभक्त श्री हनुमान का किरदार निभाने वाले अभिनेता दारा सिंह तो अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन रामायण में निभाए गए हनुमान के किरदार ने आज भी दर्शको के दिल में अपनी ज्योत जला रखी है.

60 साल की उम्र में रामायण के बजरंगी को ये रोल ऑफर हुआ था. काफी रेसलिंग करने की वजह से दारा सिंह को उन दिनों घुटनों के दर्द की समस्या थी, लेकिन वो हनुमान के किरदार के लिए रामानंद सागर कैंप की पहली पसंद थे. हनुमान के किरदार से अभिनेता और रेसलर दारा सिंह पहले ही भली भांति परिचित थे. साल 1976 में आई फिल्म बजरंगबली में दारा सिंह पहले भी हनुमान का किरदार निभा चुके थे.

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जब रामानंद सागर को दारा सिंह ने अपने घुटनों के दर्द की समस्या बताई, तो रामानंद ने कहा ये किरदार मैं नहीं खुद भगवान चाहते हैं कि आप करें, ऐसा मैंने(रामानंद) ने सपने में भी देखा है. रामानंद सागर से अपने परिवार जैसे सम्बन्ध के चलते दारा सिंह फिर ना नहीं कह पाए.

1976 में आई फिल्म बजरंगबली को डायरेक्टर चंद्रकांत ने बनाया था. इस फिल्म में मधुर संगीत दिया था कल्याण जी आनंद जी ने, लता मंगेशकर, आशा भोसले और महेंद्र कपूर की आवाज में इस फिल्म के गाने रिकॉर्ड किए गए थे.

ये फिल्म उस दौर में जबरदस्त हिट रही थी और उसके बाद से ही दारा सिंह हनुमान के किरदार के लिए सबसे पहले दावेदार माने जाने लगे. फिर 1987-88 में रामानंद सागर ने दारा सिंह को अपनी ऐतिहासिक रामायण का हनुमान बनाया और इस महाकाव्य के महारथी को दर्शकों का खूब प्यार मिला.

आज तक से दारा सिंह के बेटे और एक्टर विन्दु दारा सिंह ने खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि पिता दारा सिंह उमर गांव में हो रही रामायण की शूटिंग के समय सारा दिन हनुमान का मास्क नहीं उतारते थे.

डाइट में सिर्फ 100 बादाम और पूरे दिन 3 नारियल पानी पी कर वो शूटिंग किया करते थे. ताकि बार बार उन्हें खाने पीने के लिए अपना मास्क ना उतारना पड़े और मेकअप मैन को बार बार परेशानी ना हो.

विन्दु ने बताया कि एक दिन जब जय वीर हनुमान के लिए विन्दु को हनुमान के किरदार का ऑफर आया, तो पिता दारा सिंह ने उन्हें बताया कि भगवान मनगढंत नहीं है. इस किरदार को निभाने के लिए उन्हें नॉन वेज छोड़ना पड़ेगा.

शराब से दूरी बनानी पड़ेगी और यहां तक कि कोई भी कुविचार को अपने मन में आने से रोकना पड़ेगा. तब जा कर उनके अभिनय में वो दिव्यता झलकेगी, जिसकी अपेक्षा दर्शक मेरे बाद तुमसे भी लगाएंगे.

अपने पिता के आखिरी दिनों के बारे में विन्दु बताते है कि साल 2011 में एक दिन छत पर बैठ कर वो अपने पिता दारा सिंह से बात कर रहे थे. तब दारा जी ने कहा कि लगता है कि अब उनका वक्त इस संसार में पूरा हो गया है. जिस काम के लिए वो आये थे अब वो अंतिम पड़ाव में है.

दारा सिंह ने ये भी कहा कि उनकी मौत के बाद वो नहीं चाहते कि उनके नाम से कोई रोड, हनुमान मंदिर या संस्था बनाई जाए, या फिर उनके स्टेचू का निर्माण किया जाए. लेकिन बाद में पंजाब में दारा स्टूडियो के बाहर उनके फैंस के लिए एक प्रतिमा दर्शन के लिए बनाई गई.

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