कोर्ट ने कलेक्टर सहित सीईओ को दी ये सजा

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने टोंक जिले के कलेक्टर को दिनभर कोर्ट में रहने की सजा सुनाई। कलेक्टर ने पलाई ग्राम पंचायत में अदालती आदेश के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाने के मामले में कहा था कि अतिक्रमण हटाना कलेक्टर का नही बल्कि पंचायत का काम है। कलेक्टर के बयान को कोर्ट ने अवमानना माना है।

Court gives sentence to the CEO, including the Collector

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अदालत ने कहा कि उन्हें न्यायालय की अवमानना करने पर दंडित भी किया जा सकता है। आदेश लिखाने के बाद कलेक्टर की ओर से बिना शर्त माफी मांगने पर अदालत ने उनकी सजा को स्थगित करते हुए जाने की अनुमति दी। इसके साथ ही अदालत ने एसीएस सुदर्शन सेठी सहित अन्य सभी अवमाननकर्ताओं को 7 सितंबर को पेश होने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश पलाई ग्राम पंचायत की सरपंच रामभरोसी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

सुनवाई के दौरान अदालती आदेश की पालना में टोंक कलक्टर सूबे सिंह सहित अन्य अधिकारी अदालत में पेश हुए। कलेक्टर ने अदालत को बताया कि ग्राम पंचायत की इस भूमि पर किसान सेवा केन्द्र प्रस्तावित है, लेकिन वर्तमान में इस पर मोबाइल टॉवर लगा हुआ है। इसके अलावा भूमि के अतिक्रमण को हटाने का अधिकार ग्राम पंचायत को ही है। जिला कलक्टर इसमें सहयोग नहीं कर सकता।

कलेक्टर ने अदालत को यह भी कहा कि अदालती आदेश में सही व्याख्या नहीं हुई है। कलेक्टर इस भूमि से अतिक्रमण हटाने के आदेश नहीं दे सकता। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कलेक्टर ने न्यायालय के आदेश की वैधता पर ही सवाल उठा दिया है। उनका यह कथन ही अवमानना की श्रेणी में आता है। इसलिए उन्हें अदालत उठने तक कक्ष न छोड़ने के आदेश दिए जाते हैं।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने गत 14 फरवरी को याचिकाकर्ताओं को आदेश दिए थे कि वे भूमि से अतिक्रमण हटाने के संबंध में कलक्टर को अभ्यावेदन पेश करें और कलेक्टर अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई करे। अतिक्रमण नहीं हटने की स्थिति में अदालत ने कलेक्टर को अभ्यावेदन पर पन्द्रह दिन में आदेश पारित करने को कहा था। वहीं पालना नहीं होने पर पेश अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए गत दिनों अदालत ने कलक्टर और सीईओ सहित अन्य को 25 हजार रुपए के जमानती वारंट से तलब किया था।

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