कोर्ट समिति एक बार फिर करेगी जांच, अजीत जोगी आदिवासी हैं या नहीं

छत्तीसगढ उच्च न्यायालय ने आज राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जाति निधार्रण के मामले में गठित उच्च स्तरीय छानबीन समिति का पुनर्गठन करने के आदेश दिए।

मुख्य न्यायाधीश टी बी राधाकृष्णन और न्यायाधीश शरद कुमार गुप्ता की युगल पीठ ने जोगी की याचिका पर सुरक्षित रखे गए आदेश को आज सुनाया। इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंदकुमार साय, भारतीय जनता पार्टी नेता संतकुमार नेताम और मरवाही विधानसभा से चुनाव लड़ने वाली भाजपा प्रत्याशी समीरा पैकरा पक्षकार बनाई गई थीं।

पिछले दिनों राज्य सरकार की जाति छानबीन निधार्रण समिति ने जोगी को कंवर आदिवासी नहीं मानते हुए उनका जाति प्रमाणपत्र निरस्त करने के आदेश दिए थे। इसके बाद बिलासपुर जिला कलेक्टर पी दयानंद ने प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया था। जोगी ने 19 जुलाई 2017 को इस आदेश के खिलाफ याचिका दाखिल करते हुए समिति की रिपोर्ट निरस्त करने की मांग की थी।

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आज फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत परिसर में मौजूद जोगी ने फैसले के बाद संवाददाताओं से कहा कि न्याय की जीत हुई है। उन्होंने कहा कि इसके पहले भी उनकी जाति को लेकर न्यायालय में मामले दायर किए जाते रहे हैं, लेकिन सत्य की हमेशा जीत हुई है।

पूर्व मुख्यमंत्री जोगी ने कांग्रेस से अलग होकर छत्तीसगढ जनता कांग्रेस पार्टी बना ली थी। पिछले दिनों कांग्रेस ने उनकी पत्नी रेणु जोगी को कांग्रेस विधायक दल के उपनेता पद से हटा दिया था।

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