कोकिंग कोयला के दाम आसमान छूने से बढ़ती जा रही स्टील उत्पादन की लागत

घरेलू कोयले का उत्पादन प्रभावित होने से जहां सीमेंट का उत्पादन प्रभावित हो रहा है, वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोकिंग कोयला के दाम आसमान छूने से स्टील उत्पादन की लागत बढ़ती जा रही है। स्टील क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक अगले दो महीने तक यह स्थिति कायम रह सकती है और लागत बढ़ने से स्टील की कीमतें भी बढ़ती रहेंगी। पिछले दो महीनों में कोकिंग कोल की कीमत 220 डालर प्रति टन से बढ़कर 430 डालर प्रति टन पर पहुंच गई है। स्टील की उत्पादन लागत में लगभग 70 फीसद हिस्सेदारी कोकिंग कोयले की होती है।

स्टील क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक चीन पिछले करीब दो महीनों से अपने स्टील उत्पादन में कटौती कर रहा है। चीन अपनी जरूरत का अधिकांश कोकिंग कोल आस्ट्रेलिया से खरीदता है। जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड में कच्चे माल प्रमुख भारतेंदु गुप्ता ने बताया कि वैश्विक रूप से आस्ट्रेलिया सबसे अधिक कोकिंग कोल का उत्पादक है। लेकिन चीन द्वारा स्टील उत्पादन में कटौती करने से आस्ट्रेलिया ने भी कोकिंग कोयले के उत्पादन में कटौती कर दी जिसका असर यह हुआ कि विश्व स्तर पर कोकिग कोल की मांग के मुताबिक उत्पादन कम हो गया।

गुप्ता ने बताया कि चीन के स्टील उत्पादन कम करने से विश्व के दूसरे हिस्से में स्टील उत्पादन में बढ़ोतरी हो गई और इस कारण कोकिंग कोल की मांग उसी स्तर पर बनी रही जबकि आपूर्ति कम हो गई। भारत को इसका फायदा यह मिला कि स्टील का निर्यात बढ़ गया, लेकिन कोकिंग कोल की कमी होने से लागत बढ़ रही है और अभी अगले दो महीने तक बढ़ोतरी का रुख जारी सकता है।

 

चीन अगले साल जनवरी-फरवरी में विंटर ओलिंपिक आयोजन के बाद ही फिर से स्टील का उत्पादन पुराने स्तर पर लाएगा और तब आस्ट्रेलिया भी को¨कग कोल का उत्पादन बढ़ाएगा। ¨वटर ओलिंपिक की वजह से चीन इन दिनों कार्बन उत्सर्जन कम करने में लगा है जिस कारण चीन कई वस्तुओं की मैन्यूफैक्च¨रग को कम कर रहा है।

 

दूसरी तरफ घरेलू स्तर पर कोयले के उत्पादन में कमी से सीमेंट का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। सीमेंट उत्पादन करने वाले प्लांट अपनी बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए कैप्टिव पावर प्लांट रखते हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें कोयले की आपूर्ति नहीं हो रही है। क्योंकि बिजली संकट को देखते हुए अधिकतर कोयले की आपूर्ति फिलहाल बिजली प्लांट को हो रही है। सीमेंट उत्पादक कंपनियों के मुताबिक कोयला नहीं मिलने से कैप्टिव पावर प्लांट में बिजली उत्पादन नहीं हो पा रहा है जिससे सीमेंट का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उत्पादन कम होने से सीमेंट के दाम भी बढ़ने के पूरे आसार हैं।

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