कांग्रेस की इफ्तार पार्टी में फिर शामिल हुआ विपक्ष का बड़ा दल, शुरू होगी 2019 की तैयारी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार सक्रिय हैं। राहुल से कहीं ज्यादा सक्रिय यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी हैं। सोनिया गांधी अपनी टीम के साथ 2019 के आम चुनाव की रूपरेखा तैयार कर रही हैं। दोनों को दो शरद मिले हैं और दोनों ही बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। एक हैं एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार तो दूसरे लोकतांत्रिक जनता दल के संरक्षक शरद यादव। कांग्रेस की इफ्तार पार्टी में फिर शामिल हुआ विपक्ष का बड़ा दल, शुरू होगी 2019 की तैयारी

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी की भी सक्रियता काफी बढ़ गई है। कुल मिलाकर विपक्ष का बड़ा धड़ा फिर एक हो रहा है और 13 जून को रोजा कांग्रेस के इफ्तार पार्टी में एक बार फिर एकजुटता नजर आएगी। कांग्रेस पार्टी सूत्रों के मुताबिक छोटे-बड़े दो दर्जन से अधिक दलों के नेताओं को इसका न्यौता भेजा गया है।

उ.प्र. के प्रभारी गुलाम नबी आजाद के करीबियों के मुताबिक रोजा इफ्तार पार्टी में बिहार के साथ-साथ उ.प्र. के नेता भी आकर्षण का केन्द्र बनेंगे। बताते हैं बसपा के सकारात्मक रुख से कांग्रेस पार्टी काफी उत्साहित है। इसी तरह से बिहार से भी उसके पास अच्छी खबर है। 

पार्टी को उम्मीद है कि बिहार से यूपीए के सहयोगी दलों की संख्या बढ़ सकती है। इस इफ्तार पार्टी का आयोजन कांग्रेस पार्टी का अल्पसंख्यक विभाग कर रहा है। इस विभाग के नये प्रभारी नदीम जावेद हैं। 

जावेद फिलहाल राहुल गांधी के दिशा-निर्देश में 13 जून के कार्यक्रम को सफल बनाने में लगे हैं। इस कार्यक्रम में जनता दल(सेकुलर), बसपा, सपा, रालोद, राजद, तृण मूल कांग्रेस, डीएमके, माकपा, भाकपा समेत तमाम दलों के नेताओं तथा उनके प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

आम आदमी पार्टी को दावत क्यों नहीं?

रोजा इफ्तार में कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को दावत देने के सवाल पर मौन है। कांग्रेस का कोई व्यक्ति अभी इस बारे में कुछ नहीं कह रहा है। माना जा रहा है कि दिल्ली में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अभी आम आदमी पार्टी से दूरी बनाकर रखने के पक्ष में है।
दिल्ली में वैसे भी कांग्रेस पार्टी 2013 से सत्ता से बाहर हुई है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका था, लेकिन पार्टी के नेताओं का मानना है कि अब दिल्ली में हालात बदल गए हैं। जनता को अपनी भूल का एहसास हो रहा है।

पार्टी के रणनीतिकारों को उम्मीद है कि 2019 में प्रस्तावित आम चुनाव और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका फायदा मिलेगा। इसलिए आम आदमी पार्टी से दोस्ती और दूरी बनाने को लेकर कांग्रेस के भीतर धड़ो की राय अलग-अलग है।

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