पश्चिमी उप्र में जीत का रसायन खोजेंगे सीएम योगी, संगठन स्तर पर कई बड़े फेर बदल तय

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मेरठ । मिशन-2019 को भेदना है तो इसकी डगर पश्चिमी उप्र से निकलेगी। कुछ इसी अंदाज में भाजपा नए तेवर के साथ चुनावी तैयारियों में उतरने जा रही है, जिसकी कमान स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संभालेंगे। 18 जून को गाजियाबाद की हैवीवेट बैठक में कई निर्णय हो सकते हैं। सभी सांसदों, विधायकों एवं जिलाध्यक्षों का रिपोर्ट कार्ड परखा जाएगा। पश्चिमी उप्र की सियासी लैब में जीत का फार्मूला खोजा जाएगा। प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल भी तैयारियों की धार परखेंगे।पश्चिमी उप्र में जीत का रसायन खोजेंगे सीएम योगी, संगठन स्तर पर कई बड़े फेर बदल तय

सीएम योगी कसेंगे नट बोल्ट

कैराना एवं नूरपुर उपचुनावों में धुआंधार प्रचार के बावजूद गठबंधन ने भगवा रथ रोक दिया। राष्ट्रीय एवं प्रदेश संगठन के साथ ही मंत्रियों की जंबो टीम भी जीत न दिला सकी। सीएम योगी की रैली से उभरे धु्रवीकरण के तीर भी निशाने पर नहीं लगे। चुनाव से एक दिन पहले बागपत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली एवं तमाम योजनाओं की सौगात भी पार्टी को जीत नहीं दिला सकी। भाजपा ने न सिर्फ सीट गंवा दी, बल्कि पिछले लोकसभा चुनावों में उसके साथ खड़ा दलित मतदाता छिटकता भी नजर आया। मुठ्ठी से सरकती जा रही सियासत का नट बोल्ट कसने के लिए भाजपा नए अंदाज में फील्डिंग सजाएगी। सोमवार को गाजियाबाद में सीएम योगी सांसदों, विधायकों एवं संगठन के साथ मंथन करेंगे। पार्टी के लिए 2014 लोकसभा जैसा समर्थन जुटाना बेहद कठिन है, ऐसे में तरकश के नए तीर आजमाए जा सकते हैं। पश्चिमी उप्र में नए समीकरणों की नींव रखी जा सकती है। इस बैठक के बाद पार्टी में बड़े बदलावों की आहट है, ऐसे में सभी की नजर भी होगी।

गठबंधन का व्यूह कैसे भेदेगी भाजपा

पश्चिमी के सियासी समीकरणों को साधना सीएम योगी के लिए बेहद कठिन होगा। मोदी मैजिक के दम पर भाजपा 2014 और 2017 चुनाव में भारी मतों से जीत गई, किंतु तब से अब तक गंगा में काफी बह चुका है। कैराना एवं नूरपुर उपचुनावों में भाजपा की हार के बाद विपक्ष की ताकत बढ़ गई है। पश्चिमी उप्र की 14 लोकसभा एवं 71 विस सीटों पर बसपा की जमीन काफी मजबूत रही है। 2007 में सपा भी मजबूती से उभरी। इधर, कैराना एवं नूरपुर चुनावों में गठबंधन से रालोद की ताकत बढ़ी। पश्चिमी उप्र में जाट-मुस्लिम समीकरण भले ही अब पूरी तरह प्रभावी नहीं है, किंतु इसमें अनुसूचित वर्ग मिल गया तो भाजपा के मंसूबों पर पानी फिर जाएगा। रालोद मुखिया चौ. अजीत सिंह और जयंत चौधरी परंपरागत जाट वोटों को साधने में काफी हद तक सफल हो गए, जबकि भाजपा के पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह एवं दर्जनों जाट सांसद व विधायक नाकाम रहे। सहारनुपर से मेरठ तक भीम आर्मी के बढ़ते असर ने पार्टी की चुनौती बढ़ाई है। जिग्नेश मेवाड़ी व चंद्रशेखर के समीकरणों से अनुसूचित वर्ग भाजपा से छिटकने लगा है, जिसकी झलक कैराना व नूरपुर में देखने को मिला।

पार्टी में अंतर्कलह की आग

पार्टी में भयंकर अंतर्कलह ने कैराना की संभावनाओं में छेद कर दिया। सभी विधायक हार का ठीकरा बगल वाली सीट पर फोड़ते नजर आए। पंचायत चुनावों में दर्जनों विधायक पार्टी लाइन से बाहर होकर गैर दलों से आए नेताओं को चुनाव लड़ा रहे थे। आधा दर्जन जिलाध्यक्षों का बदलाव तय है। इन पर अन्य दलों के नेताओं के साथ मिलीभगत का भी आरोप है। रालोद ने गन्ना भुगतान का मसला उठाया तो कई भाजपाइयों ने भी गन्ना मंत्री सुरेश राणा की घेरेबंदी तेज कर दी। हालांकि शामली रैली में सीएम योगी ने रिकार्ड गन्ना बकाया भुगतान का आंकड़ा पेश कर न सिर्फ विरोधियों को जवाब दिया, बल्कि गन्ना मंत्री का ग्राफ भी संभाला।

सहारनपुर में राज्यमंत्री धर्मसिंह को लेकर बड़ा विरोध है। गंगोह न नकुड़ विस की हार का ठीकरा उनके सिर फूट सकता है। पश्चिमी उप्र की राजधानी कहलाने वाले मेरठ में अंतर्कलह का पारा चढ़ा हुआ है। पार्टी के विधायकों में भारी खींचतान है। सभी पर लेनदेन व जमीन कब्जाने का आरोप है। महानगर अध्यक्ष व जिलाध्यक्ष नगर निगम के ठेकों में एक दूसरे के आमने सामने हैं। संपर्क फार समर्थन अभियान ठीक है, किंतु ग्रामीण क्षेत्रों में लगी रही चौपालों में जमकर खेमेबाजी हो रही है। क्षेत्रीय अध्यक्ष अश्विनी त्यागी का कहना है कि सीएम योगी एवं संगठन महामंत्री सुनील बंसल गाजियाबाद में संगठन व जनप्रतिनिधियों की बैठक लेंगे, जिसमें कई महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन होगा।

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