भारत छोड़ने को मजबूर हुए चीनी मोबाइल कंपनी के कर्मचारी

नई दिल्ली। डोकलाम मुद्दे पर भारत-चीन के बीच सैनिक तनातनी का असर केवल सरहद पर ही नहीं, बल्कि उससे दूर भी खटास का असर साफ पड़ा है। इसकी वजह से ओप्पो और वीवो में काम कर रहे चार सौ से ज्यादा चीनी कर्मचारी वापस वतन लौट गए हैं। डोकलाम विवाद के बाद भारत के लोगों में चीन के खिलाफ गुस्सा बढ़ा है। इससे ओप्पो और वीवो के कारोबार में इस साल जुलाई और अगस्त महीने में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है।
चीनी कंपनियों के कारोबार में गिरावट –
चीन के खिलाफ उपजे गुस्से की वजह से दर्जनों चीनी डिस्ट्रीब्यूशन कपनियां भारतीय स्मार्टफोन बाजार के अपने बड़े केंद्रों से चीनी कर्मचारियों को वापस भेज रहे हैं। ओप्पो, वीवो जैसी बड़ी मोबाइल कंपनियों को सबसे ज्यादा नुकसान उत्तरप्रदेश, छतीसगढ़, ओड़िसा जैसे राज्यों में उठाना पड़ा है। इन राज्यों में ओप्पो और वीवो के मोबाइल फोन बेचने वाले रिटेल स्टोर्स पर भी लोगों ने तोड़फोड़ मचाई।
ओप्पो ने पेश की सफाई –
इसके बीच ओप्पो ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस पर सफाई दी है। ओप्पो की मानें तो साल 2017 उनके कारोबार के लिहाज से अच्छा रहा है। ऐसे में इस तरह की खबरें हकीकत से दूर हैं।
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बाजार पर कब्जा जमाने के लिए लड़ रही चीनी कंपनियां –
बाजार पर नजर रखने वाली संस्था सीएमआर की हालिया रिपोर्ट की मानें तो मौजूदा दौर में भारत स्मार्टफोन का बड़ा बाजार है। कारोबार के लिहाज से जहां पहले भारत और चीनी कंपनियों के बीच टक्कर होती थी। लेकिन पिछले कुछ वक्त से भारत के स्मार्टफोन बाजार पर कब्जा जमाने के लिए चीनी कंपनियों के बीच ही खींचतान मची हुई है।
सीएमआर की रिपोर्ट की मानें तो अप्रैल से जून के मध्य इस साल की पहली तिमाही में सैमसंग के बाद श्याओमी 16.2 फीसदी की हिस्सेदारी के साथ दूसरे नंबर पर था। वहीं वीवो 13 फीसदी के साथ तीसरे पायदान पर जमा हुआ है। 9.2 फीसदी मार्केट शेयर के साथ ओप्पो चौथे नंबर पर है।





