थाईलैंड की गुफा में फसे बच्चों को निकालने की हैं जारी, तैयार किये गये हैं ये तीन प्लान

थाईलैंड की गुफा में फंसे 12 बच्चों और उनके एक कोच को बाहर निकालने के लिए हर कोशिश की जा रही है, बावजूद इसके मौसम और ऑक्सीजन की कमी की वजह से ऑपरेशन में काफी दिक्कतें आ रही हैं. ये बच्चे पिछले 23 जून से इस गुफा के भीतर फंसे हैं, जिसकी चारों ओर पानी भरा है और वहां ऑक्सीजन की काफी कमी है.

रेस्क्यू टीम को अब तक ऑपरेशन में नाकामी हाथ लगी है फिर भी बच्चों को निकालने के लिए हर तरह के उपाय पर विचार किया जा रहा है. सबसे बड़ी दिक्कत पानी है जिसे लगातार गुफा से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है. इस बीच मौसम विभाग की चेतावनी ने भी चिंताएं बढ़ा दी हैं क्योंकि अनुमान के मुताबिक यहां 15 जुलाई तक भारी बारिश की आशंका है.

ऑक्सीजन की कमी से जूझना बड़ी चुनौती

रेस्क्यू टीम के प्रमुख वांग यिंगी ने बताया कि शुक्रवार को रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा है. जिसके बाद अब दूसरे विकल्प तलाशे जा रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘अब तक यह योजना थी कि धीरे-धीरे आगे बढ़कर बच्चों को बाहर निकाल लिया जाएगा. लेकिन अब हमें प्लान में बदलाव करना पड़ेगा क्योंकि अगर ऑक्सीजन का स्तर 13 फीसदी से कम रहता है तो बच्चों की जान पर खतरा मंडरा सकता है.’ बता दें कि सामान स्थिति में ऑक्सीजन का स्तर 21 फीसद रहता है जबकि बीते दिन यह 15 फीसद तक गिर गया था.

 

प्लान A- जलस्तर को कम करना

गुफा के भीतर पानी भरा हुआ है और बाहर आने के लिए 5-6 घंटे तक का वक्त लग सकता है. गोताखोर ऑक्सीजन सिलंडर के साथ तैरकर अंदर जा सकते हैं लेकिन बच्चों के लिए सिलंडर के साथ इतने लंबे वक्त तक तैरना मुमकिन नहीं होगा. साथ ही बच्चे काफी थके हुए हैं और खाने की कमी की वजह से कमजोर भी हो गए हैं. ऐसे में अगर बारिश की वजह से पानी का स्तर बढ़ जाता है तो बच्चों को निकालना मुश्किल होगा. जानकारी के मुताबिक एक बच्चे को गुफा से बाहर लाने के लिए कम से कम 2 गोताखोर लगाने होंगे.

प्लान B- ट्यूब के जरिए निकालने की कोशिश

गुफा में ट्यूब डालकर बच्चों के बाहर निकालने के उपाय पर भी विचार किया जा रहा है. स्थानीय कंस्ट्रक्शन कंपनी ने बचाव दल को सुझाव दिया है कि वह बाहर से भीतर तक जाने वाले ट्यूब के रास्ते बच्चों को बाहर ला सकते हैं. यह ट्यूब पानी के भीतर डाले जाएंगे जिनके अंदर पानी नहीं होगा. लेकिन इसके भीतर भी ऑक्सीजन की कमी और घुटन से जूझना पड़ सकता है.

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प्लान C- चिमनियां से बाहर निकालने पर विचार

बचाव दल ने गुफा के ऊपर पहाड़ पर चिमनियां बनाकर बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश पर भी काम करना शुरू कर दिया है. इसके लिए 100 से ज्यादा चिमनियां तैयार की गई हैं. इन्हें 400 मीटर गहाराई तक डाला जाएगा लेकिन इस काम में दिक्कत यह है कि अभी तक बच्चों की लोकेशन का सटीक पता नहीं लगाया जा सका है. गुफा की गहराई इससे ज्यादा भी हो सकती है.

भारत समेत दुनिया के कई मुल्कों ने थाई सरकार के सामने ऑपरेशन में मदद करने की पेशकर की है. इसके अलावा नेवी सील कंमाडो से लेकर सेना और स्पेशल फोर्स को इस काम में लगाया गया है. दुनियाभर की मीडिया यहां रेस्क्यू ऑपरेशन को कवर कर पहुंची हुई है. भारत से ‘आजतक’ ऐसा पहला चैनल है जो मौके पर मौजूद है. स्थानीय लोग विदेश से आने वाले मीडियाकर्मियों की मदद में जुटे हैं और उन्हें ऑपरेशन की जगह पहुंचाने का इंतजाम भी कर रहे हैं.

 

रेस्क्यू के दौरान एक जवान की मौत

बच्चों को बचाने में मदद करते हुए ऑक्सीजन की कमी के कारण सेना के एक पूर्व नेवी सील की मौत हो चुकी है. चिआंग राय के डिप्टी गवर्नर पास्साकोर्न बूनयालक ने कहा, ‘स्वेच्छा से मदद करने वाले एक पूर्व नेवी सील की गुरुवार रात करीब 2 बजे मौत हो गई.’ गोताखोर की पहचान समन कुनोंत के तौर पर हुई है. कुनोंत थाम लुआंग गुफा के भीतर एक स्थान से वापस आ रहे थे.

पानी के बीच गुफा में फंसे हैं बच्चे

यह सभी बच्चे चिआंग राय प्रांत के थाम लुआंग गुफा में फंसे हुए हैं, वहां से निकलना बेहद मुश्किल है क्योंकि वहां चारों तरफ पानी फैला हुआ है, रास्ता बेहद संकरा है, वहां अंधेरा है और कीचड़ होने के कारण वहां से बाहर आने के लिए उन्हें बेहद मशक्कत करनी पड़ेगी.

गुफा के प्रवेश द्वार से लेकर जिस स्थान पर बच्चों और उनके कोच ने शरण ली है, उस स्थान तक पहुंचने में 11 घंटे का समय लगता है, इसमें छह घंटे जाने और पांच घंटे लौटने में लगते हैं. थाईलैंड की अंडर 16 फुटबॉल टीम के 12 बच्चे और उनके 25 वर्षीय कोच 23 जून से लापता हैं.

ऐसा अनुमान है कि उन्होंने भारी बारिश की वजह से गुफा में शरण ली थी और बारिश की वजह से गुफा का प्रवेश द्वार बंद हो गया. इन बच्चों की उम्र 11 से 16 साल के बीच है. फिलहाल यह सभी बच्चे स्वस्थ हैं, हालांकि कुछ को मामूली चोट जरूर आई है.

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