चमोली आपदा: तपोवन सुरंग से आज मिले दो शव, मृतकों की संख्या हुई 58 31 की हुई पहचान…

चमोली जिलाधिकारी स्वाती भदौरिया ने मंगलवार को आपदा के राहत बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने सर्च ऑपरेशन के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। लापता लोगों से परिजनों से भी वह मिलीं।

डीआईजी एसडीआरएफ रिद्धीम अग्रवाल ने बताया बरामद कुल 58 शवों में से 31 की पहचान हो चुकी है। सुरंग से मिले 11 शवों की पहचान की जा चुकी है। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ के साथ डॉग स्क्वॉयड रैणी गांव, तपोवन और आसपास के इलाकों में लापता लोगों की खोज कर रहे हैं। 

राहत बचाव कार्य रुकामंगलवार को दोपहर करीब एक बजे तपोवन सुरंग के अंदर मलबा हटाने के दौरान अचानक पानी आना शुरू हो गया। जिसके बाद राहत बचाव कार्य रोक दिया गया है। सुरंग से पानी की निकासी के लिए पंप लगाया जा रहा है।

प्लूटोनियम पैक की जांच करे सरकार

– उत्तराखंड के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि हम इस बात से चिंतित हैं कि ग्लेशियर कैसे पिघल रहे हैं और पहाड़ों में ज्वार लहर पैदा कर रहे हैं। प्लूटोनियम पैक जिसे चीन की गतिविधियों की निगरानी करने के लिए रखा गया था, वह अब वहां नहीं है। हम सरकार से पैक की भी जांच करने का अनुरोध करते हैं।

आपदा में यूपीसीएल को 30 लाख का नुकसानऋषिगंगा में आई आपदा में ऊर्जा निगम को करीब 30 लाख का नुकसान हुआ है। सीमांत गांव पैंग में अभी भी बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए काम चल रहा है। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता कैलाश कुमार के अनुसार तपोवन से पैंग गांव तक करीब तीन किमी बिजली लाइन टूट गई, जिससे पैंग गांव की आपूर्ति ठप है। आपदा में 32 बिजली के पोल और तीन ट्रांसफार्मर बह गए थे। रैणी से पैंग गांव जाने के लिए सड़क और पैदल रास्ते टूट चुके हैं, जिसके चलते मजदूरों को हेली सेवा के जरिए क्षेत्र में पहुंचा दिया गया है। ट्रांसफार्मर, बिजली के पोल और तार भी क्षेत्र में पहुंचाए जा चुके हैं। आपदा के बाद घाटी में बने कठिन हालातों में कर्मचारी और मजदूर लाइन बिछाने में जुटे हैं। 11 केवी बिजली की लाइन बिछाने का काम जारी है। जल्द गांव में बिजली बहाल कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि गांव में प्रशासन की तरफ से सोलर लाइटें बांटी गई हैं। वहीं विभाग की तरफ से गांव में जनरेटर भेजा गया है, ताकि लोग अपने मोबाइल आदि चार्ज कर सकें।

निरंतर जारी रहेगा राहत बचाव कार्य और सर्च अभियान

– उत्तराखंड डीजीपी अशोक कुमार ने कहा है कि चमोली आपदा में राहत बचाव कार्य और सर्च अभियान आखिरी लापता व्यक्ति की खोज तक जारी रहेगा। 

आपदा में यूपीसीएल को 30 लाख का नुकसानऋषिगंगा में आई आपदा में ऊर्जा निगम को करीब 30 लाख का नुकसान हुआ है। सीमांत गांव पैंग में अभी भी बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए काम चल रहा है। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता कैलाश कुमार के अनुसार तपोवन से पैंग गांव तक करीब तीन किमी बिजली लाइन टूट गई, जिससे पैंग गांव की आपूर्ति ठप है। आपदा में 32 बिजली के पोल और तीन ट्रांसफार्मर बह गए थे। रैणी से पैंग गांव जाने के लिए सड़क और पैदल रास्ते टूट चुके हैं, जिसके चलते मजदूरों को हेली सेवा के जरिए क्षेत्र में पहुंचा दिया गया है। ट्रांसफार्मर, बिजली के पोल और तार भी क्षेत्र में पहुंचाए जा चुके हैं। आपदा के बाद घाटी में बने कठिन हालातों में कर्मचारी और मजदूर लाइन बिछाने में जुटे हैं। 11 केवी बिजली की लाइन बिछाने का काम जारी है। जल्द गांव में बिजली बहाल कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि गांव में प्रशासन की तरफ से सोलर लाइटें बांटी गई हैं। वहीं विभाग की तरफ से गांव में जनरेटर भेजा गया है, ताकि लोग अपने मोबाइल आदि चार्ज कर सकें।

निरंतर जारी रहेगा राहत बचाव कार्य और सर्च अभियान

– उत्तराखंड डीजीपी अशोक कुमार ने कहा है कि चमोली आपदा में राहत बचाव कार्य और सर्च अभियान आखिरी लापता व्यक्ति की खोज तक जारी रहेगा। 

– उत्तराखंड के सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि चमोली में ग्लेशियर फटने की घटना की सभी एंगलों से जांच की जानी चाहिए। इसके लिए हम एक विभाग बनाएंगे। ताकी उपग्रह से ग्लशियरों पर नजर रखी जा सके।जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि सुरंग से मलबा हटाने का कार्य जारी है। मलबे में मिल रहे शवों का मौके पर ही पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंपा जा रहा है। जिनके परिजन समय पर शवों को लेने के लिए नहीं पहुंचे तो ऐसे शवों के डीएनए सुरक्षित रखे जा रहे हैं।

अलकनंदा नदी बयां कर रही आपदा की कहानीरैंणी व तपोवन क्षेत्र में आई जल प्रलय की कहानी अलकनंदा नदी बयां कर रही है। नदी का मटमैला पानी को देखकर नौ दिन पहले हुई बर्बादी की तस्वीर साफ झलक रही है। नदी के चारों तरफ मलबे और लकड़ियों के ढेर लगे हैं। नदी में मछलियों के मरने की दुर्गंध अभी भी फैल रही है। नदी किनारे मलबे में आपदा के दौरान बहे लोगों को खोजने में जवान दिखाई दे रहे हैं। साथ ही ऋषिगंगा घाटी क्षेत्र के गांवों में भी सन्नाटा पसरा है।

बता दें कि विगत सात फरवरी को ग्लेशियर टूटने से उत्तराखंड के चमोली जिले में आपदा आ गई थी। आपदा में कुल 206 लोग लापता हुए थे। वहीं ऋषिगंगा परियोजना पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।

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