CBI विवाद: जिम में पसीना बहाने के अलाव शीर्ष अधिकारियों के पास कोई काम नहीं…

विजय माल्या का भारत प्रत्यर्पण करवाने या शारदा घोटाला के आरोपी के खिलाफ सबूत जुटाने की बजाए केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) के अधिकारी इन दिनों खुद को फिट बनाने में जुटे हुए हैं। लोधी रोड स्थिति सीबीआई के मुख्यालय में बने जिम के अंदर अधिकारी पसीना बहा रहे हैं। सीबीआई के एक सूत्र के हवाले से अखबार ने लिखा है, ‘सभी उच्च स्तरीय मामलों की जांच तब से रुक गई है जब से सरकार ने हमारे दो टॉप अधिकारियों (निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना) को एक महीने पहले छुट्टी पर भेज दिया।’
सूत्र ने कहा, ‘इनमें से कुछ मामले राजनीतिक तौर पर संवेदनशील हैं। वरिष्ठ अधिकारी डर की वजह से फाइलों को छूने से भी बच रहे हैं। उन्हें लगता है कि फाइलें देखने से वह किसी विवाद में आ जाएंगे या फिर उन्हें सुप्रीम कोर्ट के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।’ जांच एजेंसी में हर कोई वर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहा है।
सूत्र ने बताया, ‘चीजे इस मोड़ पर आ चुकी हैं कि कोई भी वरिष्ठ अधिकारी कोई निर्णय नहीं लेना चाहता, अपने से नीचे के अधिकारियों को छापेमारी करने या फिर लोगों को पूछताछ के लिए समन भेजने का आदेश नहीं दे रहा है। जबकि इन मामलों में जांच के लिए यह कार्रवाई की जानी जरूरी हैं। हर कोई सुरक्षित रहना चाहता है।’ यह परेशानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा 26 अक्तूबर को दिए आदेश के बाद शुरू हुई। वर्मा की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को कोई भी नीतिगत या महत्वपूर्ण फैसला लेने से मना कर दिया। इसके अलावा उनके कामकाज को रुटीन कार्यों तक सीमित कर दिया।
सीबीआई के दूसरे अधिकारी ने कहा, हमारे पास इंतजार करने और नतीजे देखने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। एक अधिकारी ने कहा, ‘वर्मा और अस्थाना के बीच उपजे विवाद ने जांच एजेंसी की छवि खराब की है और इससे उसपर काफी तनाव आ गया है। एक अच्छा वर्कआउट हमें इस तनाव से मुक्ति दिला सकता है। इसके अलावा हम काम पर हमेशा ओवरस्ट्रेच रहते हैं। बदलाव के लिए जिम में आकर स्ट्रेज करना अच्छा होता है।’ हालांकि एजेंसी को एक अहम निर्णय लेना होगा क्योंकि ब्रिटेन की अदालत माल्या के प्रत्यर्पण मामले में 10 दिसंबर को फैसला देने वाली है। अस्थाना इस मामले को देखा करते थे।





