बछड़ा मरने पर जाति पंचायत ने विधवा को घर छोड़कर भीख मांगने का सुनाया फरमान
ग्वालियर. एक विधवा महिला के डंडा मारने से गाय का बछड़ा मरने पर जाति पंचायत ने बेटों को मजबूर किया कि वे मां को घर निकालें और वह भीख मांगकर अपने गौ हत्या के पाप का प्रायश्चिचत करे। पंचायत के फरमान पर महिला भीख मांगने निकली और दो दिन भूख से बेहाल होकर बेहोश हो गई। इसके बाद बेटों ने मां को हॉस्पिटल पहुंचाया। इसके बाद भी बेटे पंचायत के दबाव में पुलिस को लिखकर दे आए कि उन्हें कोई कार्रवाई नहीं करनी है।

यह है मामला…
-भिंड के मातादीन का पुरा इलाके में अनिल श्रीवास रहते हैं। उनके पिता का देहांत हो चुका है। घर में मां कमलेश देवी रहती हैं। घर में ही एक गाय है, जिसकी देखभाल कमलेश देवी करती हैं।
-31 अगस्त को श्रीमती कमलेश गाय का दूध निकाल रही थीं। उसी दौरान बछड़ा दूध पीने आ गया। कमलेश देवी ने उसे डंडा मार दिया, जिससे बछड़े की मौत हो गई।
पंचायत ने मजबूर किया भीख मांगने पर
-इस घटना को श्रीवास समाज ने कलंक करार दिया और कहा कि गौहत्या का प्रायश्चितकरना होगा। समाज की पंचायत बैठी और उसके अध्यक्ष शंभुदयाल श्रीवास ने फरमान सुनाया कि कमलेश देवी 40 दिन तक घर से बाहर रहेंगी और भीख मांगकर गौ हत्या का प्रायश्चित करेंगी। जब यह अवधि पूरी हो जाएगी तो वे गंगा में जाकर स्नान भी करेंगी।
-कमलेश देवी के बेटे अनिल ने समाज से विनती की तो उन्हें 40 दिन की बजाय 7 दिन का घर निकाला आदेश दे दिया। इसके बाद बेटे ने मजबूरी में मां कमलेश देवी को घर से निकाल दिया।
भीख मांगने के दौरान हुई बेहोश
– कमलेश देवी दो दिन तक घर-घर जाकर भीख मांगती रहीं। इस दौरान उन्हें खाना तक नहीं मिला। 2 अगस्त की शाम को कमलेश देवी भूख के कारण सड़क पर ही बेहोश हो गईं।
-इसके बाद भी बेटा अनिल मां को घर लाने से बचता रहा, लेकिन उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। इसके बाद यह मामला गर्मा गया और श्रीवास समाज के अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की मांग होने लगी।
बेटा नहीं चाहता पंचायत पर कार्रवाई
-अब समाज के अध्यक्ष शंभुदयाल कह रहे हैं कि कमलेश देवी ने खुद ही पंचायत बुलाकर स्वयं गौहत्या का प्रायश्चित करने की बात कही थी। पंचायत ने कोई फरमान जारी नहीं किया।
-वहीं कमलेश देवी का बेटा अनिल पंचायत के फरमान की बात कह रहा है। हालांकि इसके बाद भी वह पुलिस में आवेदन देकर आया है कि वह किसी किस्म की कार्रवाई पंचायत करने वालों नहीं चाहता है।





