कैप्टन अमरिंदर सिंह को लगातार दूसरा झटका, राणा के बाद सुरेश पर खतरा

चंडीगढ़। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को लगातार दूसरा झटका लगा है। चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी सुरेश कुमार की नियुक्ति हाईकोर्ट द्वारा बुधवार को रद करने से पहले उनके सबसे करीबी मंत्री राणा गुरजीत सिंह ने रेत की खड्डों की नीलामी में नाम आने और घोटाले के आरोपी ठेकेदार से पैसे लेने के आरोप में घिरने के चलते इस्तीफा दिया था। राणा के इस्तीफे के बारे में फैसला अाज दिल्ली में राहुल गांधी के साथ कैप्टन अमरिंदर सिंह की होने वाली मीटिंग में होगा। जानकार सूत्रों का कहना है कि राणा गुरजीत सिंह का जाना तय है।

कैप्टन सरकार में सबसे पावरफुल अफसर थे सुरेश कुमार, उनके जाने को लेकर मंत्रियों व अफसरों में बेचैनी

राणा का इस्तीफा अभी स्वीकार भी नहीं हुआ था कि कैप्टन सरकार में सबसे पावरफुल नौकरशाह और कैप्टन की आंख और कान कहे जाने वाल सुरेश कुमार ने अपने चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी के पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि जब उनके खिलाफ याचिका दायर हुई थी तो उन्होंने 2 अगस्त को अपना इस्तीफा सीएम को भेज दिया था। 17 नवंबर को भी उन्होंने अपना दूसरी बार इस्तीफा भेजा लेकिन सीएम ने इसे मंजूर नहीं किया। अब सरकार फैसले का अध्ययन कर डबल बेंच में अपील कर सकती है।

सरकार करे फैसला: सुरेश कुमार

उधर, सुरेश कुमार से संपर्क करने का बार बार प्रयास किया गया लेकिन वह बात करने को राजी नहीं हुए। उन्होंने केवल इतना कहा कि आगे क्या करना है इस बारे में सरकार फैसला करे, मैंने तो चार्ज छोड़ दिया है।

कैप्टन अमरिंदर सिंह को लगातार दूसरा झटका, राणा के बाद सुरेश पर खतरा

सुरेश कुमार ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के 2002-07 के कार्यकाल में साढ़े तीन साल प्रिंसिपल सेक्रेटरी के रूप में अहम भूमिका निभाई थी। अपनी प्रशासनिक काबिलियत के लिए पहचाने जाने वाले सुरेश कुमार को अकाली-भाजपा सरकार में भी चीफ सेक्रेटरी पद पर नियुक्‍त की बात चली थी। सीएम प्रकाश सिंह बादल इसके पक्ष में भी थे लेकिन डिप्टी सीएम सुखबीर बादल नहीं माने और 1982 को सर्वेश कौशल को चीफ सेक्रेटरी बना दिया। 30 अप्रैल 2016 को वह एडिशनल चीफ सेक्रेटरी डेवलपमेंट के तौर पर रिटायर हो गए। 

क्यों उठा विवाद

17 मार्च 2017 को कैप्टन अमरिंदर सिंह के चार्ज लेते ही उन्हें सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुरेश कुमार को चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी के पद पर नियुक्त कर दिया गया। यह न तो काडर पोस्ट है और न ही एक्स काडर पोस्ट। पंजाब में इस तरह की पोस्ट पहली बार सृजित की गई। हालांकि गुजरात समेत कुछ राज्यों में पहले से ऐसा प्रावधान रह चुका है। गुजरात में के.कैलाशनाथन जो 2013 में रिटायर हो गए थे, को इसी तरह लगाया गया था।

सरकार के पास क्या विकल्प

ग्रामीण विकास मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा का कहना है कि सरकार किसी भी कीमत पर सुरेश कुमार को जाने नहीं देगी। जजमेंट आने के बाद उसे स्टडी करके डबल बेंच में इसकी अपील की जाएगी। 

अफसरों व मंत्रियों को भी लगा झटका

सुरेश कुमार के खिलाफ फैसला आते ही सरकार में काम कर रहे अफसरों और मंत्रियों को यह किसी बड़े झटके की तरह लगा है। उनका कहना है कि ऐसी उम्मीद नहीं थी। एक सीनियर आईएएस ने कहा, सुरेश कुमार की काबिलियत और समर्पण का कोई सानी नहीं है। 

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