लखनऊ.बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौत को विपक्ष ने नेशनल ट्रेजडी बताया था। सरकार ने अपनी ओर से जांच कराई और एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन उसकी कॉपी को छुपाए रखा।
आगे पढ़िए कौन-कौन हैं आरोपी और किन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर…
ये हैं आरोपी
1- मनीष भंडारी, एमडी पुष्पा सेल्स
2-उदय प्रताप शर्मा
3-संजय कमार त्रिपाठी
4-सुधीर कुमार पांडेय
5-डॉ.राजीव मिश्र, प्रिसिंपल
6-डॉ. सतीश, एचओडी एनेस्थीसिया
7-डॉ.कफील, ईएएस प्रभारी
8-डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, होम्योपैथिक चिकत्साधिकारी
9-गजाननंद जायसवाल, चीफ फार्मासिस्ट
ये लगी हैं धाराएं
-आईपीसी 409- (लोक सेवक द्वारा आपराधिक कार्य में शामिल)
-आईपीसी 308- (गैर इरादतन हत्या)
-आईपीसी 120बी (आपराधिक साजिश )
-भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा- 8
-इंडियन मेडिकल कॉउंसिल एक्ट-15
-आईटी एक्ट 2000 की धारा- 66
किस पर क्या हैं आरोप
-मनीष भंडारी (एमडी पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड): कंपनी ने लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति के दायित्व को पूरा नहीं किया। यह कार्य आपराधिक न्याय भंग (क्रिमिनल एक्ट) की श्रेणी में आता है। 3 अगस्त को जानकारी दिए जाने के बाद भी इन्होंने ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दिया। कंपनी का गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है।
-डॉ. राजीव मिश्र, सस्पेंड प्रिसिंपल बीआरडीःघूस के लालच में इन्होंने 2016-17 का ढाई करोड़ लैप्स करा दिया और अगस्त में बजट होने के बावजूद घूस की लालच में भुगतान रोका गया। इन पर यह भी आरोप है कि ऑक्सीजन की कमी होने के बावजूद वह 10 अगस्त को सीनियर अधिकारियों को सूचना दिए बगैर कॉलेज से चले गए, जो आपराधिक षड्यंत्र की श्रेणी में आता है।
-डॉ.सतीश, एचओडी एनेस्थीसिया बीआरडीःऑक्सीजन बाधित होने की जानकारी के बावजूद यह विभाग और मुख्यालय छोड़कर चले गए। उन्होंने बच्चों की जान बचाने का प्रयास नहीं किया, जबिक इन्हें पता था कि ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मृत्यु हो सकती है।
-डॉ. कफील खांः इन्होंने एमसीआई में रजिस्ट्रेशन न होने के बाद भी पत्नी के नर्सिंग होम में अनुचित लाभ के लिए प्रैक्टिस, मरीजों के इलाज में अपेक्षित प्रत्यास नहीं किया गया। सरकारी डॉक्टर होते हुए भी कफील ने संचार माध्यमों के जरिये लोगों और जनता को धोखा देने का प्रयास किया गया। सरकारी नियमों का दुरुपयोग किया गया।
-डॉ. पूर्णिमा शुक्लाःअपने पति राजीव मिश्र से भ्रष्ट आचरण कराने में इनका महत्वपूर्ण योगदान था। वह लेखा विभाग के कर्मचारियों को फोन करके कमीशन और अवैध रूप से धन वसूलती थीं।
-गजानंद जायसवालःडॉ. पूर्णिमा शुक्ला से मिलकर कमीशन के लिए फर्मों का भुगतान करते थे।
-उदय प्रताप शर्मा लिपिक लेखा, संजय त्रिपाठी सहायक लिपिक, सुधीर पांडेय और तत्कालीन प्रिंसिपल राजीव मिश्रःएफआईआर में इन लोगों को घूस की लालच में लिक्विड ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली कंपनी का भुगतान रोकने का दोषी ठहराया गया है।
एक्सपर्ट उठा रहे ये सवाल
-एक्सपर्ट की मानें तो जब बीआरडी कॉलेज में इस तरह का भ्रष्टाचार हो रहा था तो प्रेक्षण के जिम्मेदारी अधिकारी क्या कर रहे थे? इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत के बाद भी उन्हें जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया गया?
-बता दें, केके गुप्ता डीजी चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण इस मुकदमें के वादी हैं। उन्होंने कहा, हमने मुकदमा दर्ज करा दिया है अब पुलिस जांच कर रही है। इस मामले में अभी कुछ बोलना सही नहीं हैं।
क्या है गोरखपुर ट्रेजडी?
– बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में 7 अगस्त से लेकर 12 अगस्त तक 30 बच्चों समेत 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। आरोप है कि ये मौतें हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने की वजह से हुईं।
– कहा जा रहा है कि पुष्पा सेल्स नाम की कंपनी ने पेमेंट बकाया होने की वजह से ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई रोक दी थी। कंपनी ने कहा कि हमने 14 रिमांडर भेजे, लेकिन इसके बाद भी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने कोई एक्शन नहीं लिया।