BRD मेडिकल कॉलेज में टूटा 12 साल मौत का रिकॉर्ड…

लखनऊ.यूपी के हेल्थ मिनिस्टर सिद्धार्थनाथ सिंह ने गोरखपुर मेड‍िकल कॉलेज (BRD) में बच्चों की मौत के बाद एक बयान दिया था। उन्होंने कहा था- ”अगस्त महीने में मौतें होती हैं। ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ है।” आपको बता दें, 1 से 30 अगस्त 2017 तक BRD में 399 मौतें हो चुकी हैं। इस बार मौत के आंकड़े ने पिछले 12 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। 30 अगस्त को सीएम योगी ने अपने एक बयान में कहा- ”सब चाहते हैं कि उनके बच्चों का लालन-पोषण सरकार करे।” उनके इस बयान के बाद यूपी की हेल्थ डिपार्टमेंट की चर्चा शुरू हो गई है। आज आपको 2005 से अब तक BRD में मौत के मौसम (अगस्त महीना) में हुई डेथ के आंकड़ों को बताएगा। साथ ही यूपी में हेल्थ ड‍िपार्टमेंट के सच से भी रूबरू कराएगा।
BRD मेडिकल कॉलेज में टूटा 12 साल मौत का रिकॉर्ड...
नोट: खबर में आंकड़े BRD मेडिकल कॉलेज, केंद्र सरकार के अधीन सेन्ट्रल ब्यूरो ऑफ हेल्थ ऑर्गेनाईजेशन की नेशनल हेल्थ प्रोफाइल, WHO (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन) और यूपी सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़ों से लिए गए हैं।

8 महीने में BRD में मौत का आंकड़ा…

– गोरखपुर का बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज ( BRD) उस समय चर्चा में आया जब अगस्त 2017 में अचानक इन्सेफ्लाइटिस वार्ड में 48 घंटों में 30 बच्चों की मौत हो गई। यह सिलसिला अभी भी जारी है।
– मेड‍िकल कॉलेज से मिले आंकड़ों के मुताब‍िक, 1 से 30 अगस्त तक 399 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें 176 बच्चे शामिल हैं। महीने में 14 दिन ऐसे बीते जब 5 से ज्यादा 6, 7, 8, 9, 10, 11 या 15 बच्चों की मौत हुई।
– जनवरी से अगस्त तक 8 महीने में BRD में मरने वालों की संख्या कुल 1346 है। जनवरी में 152, फरवरी में 122, मार्च में 159, अप्रैल में 123, मई में 139, जून में 137, जुलाई में 128 और 30 अगस्त तक 399 मौत हुई।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

बातचीत में बीजेपी सांसद कमलेश पासवान ने कहा- ”पहले हॉस्प‍िटल में मरीज कम आते थे, तो मौत के आंकड़े भी कम रहते थे। अब ज्यादा आते हैं, तो मौत के आंकड़े भी उसी हिसाब से बढ़ रहे हैं। हम पिछले कई सालों से सदन में इंसेफ्लाइंट‍िस और वेक्टर जनित बीमारियों के लिए वैक्स‍िनेशन बनाए जाने की बात उठाते रहे हैं। हमारे प्रस्ताव पर ही केंद्र सरकार इस पर शोध करवा रही है। आनें वाले समय में हमारे पास इंसेफ्लाइट‍िस का इलाज भी होगा।”

#प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रशान्त त्रिवेदी ने कहा- ”सीधी सी बात है कि जब केस रजिस्टर होते हैं, तो कहा जाता है कि क्राइम रेट बढ़ गया। लेकिन अगर केस रजिस्टर्ड नहीं होंगे तो इससे जनता को ही परेशानी होगी। कुछ ऐसा ही हाल मरीजों की मौत में भी है। मरीज अब ज्यादा एडमिट हो रहे हैं, तो डेथ रेट भी बढ़ रहा है। हम फीवर सर्च करा रहे हैं। इसके जरिए अब लोगों को मालूम हो रहा है कि बच्चे को इंसेफ्लाइटिस हुआ है। CHC-PHC पर भी इनकी जांच करवा रहे हैं। हम पूरी तरह से इस बुखार को सर्च कर रहे हैं, तो संख्या बढ़ रही है। जबकि ठीक होने वालों की संख्या कहीं ज्यादा है। पिछले सालों की तुलना में इंसेफ्लाइटिस से होने वाली मौतों की संख्या में भी कमी आई है।

विपक्षी पार्ट‍ियों का क्या है कहना…

 कांग्रेस के पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी ने कहा- ये सरकार पूरी तरह से फेल साबित हो चुकी है। बीजेपी पिछले 15 सालों से सत्ता से दूर थी, अब उसे सत्ता मिली है, तो वो अपने को राजा समझ रही है। उसे जनता की तकलीफों से कोई मतलब नहीं। स्वास्थ्य मंत्री को बर्खास्त करना चाहिए।
 सपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चैधरी ने कहा- बीजेपी चाहे जितने जतन कर ले, लेकिन अपनी कमजोर शासन पर पर्दा नहीं डाल सकती। BRD के पिछले सालों का रिकार्ड देखें, तो हमारी सरकार के समय बच्चों को बचाया गया। जबकि इस बार ये आंकड़ा बहुत ज्यादा हो गया। ये दिखाता है कि वर्तमान सरकार कितनी लापरवाह है। जनता जल्द ही इन्हें सबक सिखाएगी।

पिछले 10 सालों में मौत का आंकड़ा…

– BRD में 2006 में जनवरी से दिसंबर तक 1940 पेशेंट एडमिट किए गए, जिसमें 431 (22.21%) की मौत हो गई।

– 2007 में 2423 मरीज एडमिट हुए, 516 (21.29%) की मौत हुई। 
– 2008 में 2194 मरीज एडमिट, 458 (20.87%) की मौत।
– 2009 में 2663 मरीज एडमिट, 525 (19.71%) की मौत।
– 2010 में 3303 मरीज एडमिट, 514 (15.56%) की मौत।
– 2011 में 3308 मरीज एडमिट, 636 (19.22%) की मौत।
– 2012 में 2517 मरीज एडमिट, 531 (21.09%) की मौत।
– 2013 में 2111 मरीज एडमिट, 616 (27.88%) की मौत।
– 2014 में 2209 मरीज एडमिट, 622 (28.15%) की मौत।
– 2015 में 1761 मरीज एडमिट, 446 (25.32%) की मौत।
– 2016 में 1965 मरीज एडमिट, 514 (26.15%) की मौत।

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