बीजेपी को देनी होगी एक और अग्नि परीक्षा!

बीजेपी की अग्निपरीक्षा अभी ख़त्म नहीं हुयी है। पांच लोकसभा सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में बीजेपी को अपना दम दिखाना होगा। अगर ये सीटें बीजेपी के पाले से निकल गयी तो ना सिर्फ बीजेपी कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर हो जाएगा वल्कि वह लोकसभा में साधर्म बहुमत से भी नीचे खिसक जायेगी। गोरखपुर और फूलपुर में भाजपा को मिली करारी शिकस्त के बाद बीजेपी के लिए यह पांच सीट करो या मरो के सामान है।

गौरतलब है कि पांच सीटों पर उपचुनाव की तारीखों की घोषणा चुनाव आयेाग कर सकता है। जिन पांच जगह चुनाव होने हैं उनमें से तीन सीटों पर 2014 में भाजपा प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी। यह सीटें हैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कैराना, महाराष्ट्र की पालघर और भंडारा गोदिया हैं। इसमें सबसे दिलचस्प मुकाबला कैराना में होने की उम्मीद लगाई जा रही है। यहां के लोगो का मिजाज अब पहले जैसा नहीं रहा। आम लोगो के मन में बीजेपी के प्रति गुस्सा भी भरा हुआ है और जातीय खेल से भी लोग परेशान हैं। बदले हुए चुनावी समीकरण के बीच यह सीट जीतना भी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती साबित होने जा रहा है। भाजपा रणनीतिकार भी मानते हैं कि कैराना का उपचुनाव भाजपा के विकास, भ्रष्टाचार और विचारधारा की लड़ाई के बजाय जातीय समीकरण और ध्रुवीकरण की जंग पर आधारित होगा।

उधर ,दूसरी तरफ महाराष्ट्र की दो सीटें भी भाजपा के विकास के नारे की परीक्षा के लिए तैयार हैं। खास बात यह है कि यहां कांग्रेस शरद पवार के साथ गठबंधन के प्रयास में जुटी हुई है। दूसरी तरफ शिवसेना में पहले से ही भाजपा विरोध के सुर फूट चुके हैं। जिसका समर्थन भाजपा को मिलने की उम्मीदें कम ही नजर आ रही हैं। ऐसे में गोदिया और पालघर सीटों पर कब्जा बरकरार रखना भाजपा के लिए चुनौती भरा साबित हो सकता है। इसके अलावा बची हुई दो अन्य सीटें भाजपा के सहयोगी दलों के पास हैं।

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इसमें एक सीट जहां जम्मू-कश्मीर में पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के द्वारा खाली की गई है, जबकि दूसरी सीट नगालैंड में हाल ही में मुख्यमंत्री बने नेफ्यू रियो द्वारा इस्तीफा दिए जाने से खाली हुई है। हालांकि ये दोनों सीटे बीजेपी सहयोगी पार्टी की ही है और संभवतः बीजेपी यहां अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी लेकिन विपक्ष की राजनीति जिस तरह से आक्रामक होती दिख रही है उससे साफ़ है कि मुकाबला आसान नहीं होगा।

 

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