योगी सरकार का बड़ा एक्शन: तीन अफसर बर्खास्त, सात जबरन रिटायर
लखनऊ.राज्य सरकार ने चकबंदी निदेशालय स्तर पर एक से अधिक बार दंडित किए जा चुके 7 अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। चकबंदी निदेशालय ने 50 साल से अधिक आयु वाले कुछ अधिकारियों को रिटायरमेंट देने का भी फैसला लिया है। ये वे अधिकारी हैं जिनकी आयु 50 साल से अधिक हैं और जिनके खिलाफ पूर्व में कुछ दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। यह निर्णय सरकार के निर्देश के बाद चकबंदी आयुक्त डॉ. रजनीश दुबे की अध्यक्षता में गठित स्क्रीनिंग कमेटी की संस्तुति के बाद लिया गया है। यह आदेश 14 अगस्त 2017 से प्रभावी कर दिया गया है।

इन्हें दिए गया रिटायरमेंट
-प्रमोद कुमार त्रिपाठी बन्दोबस्त अधिकारी चकबंदी जिला बांदा
-ओमकार नाथ चकबंदी अधिकारी संत रविदास नगर
-गिरीश कुमार दिवेदी सहायक चकबंदी अधिकारी उन्नाव
-राजकुमार शर्मा सहायक चकबंदी अधिकारी ऐटा
-वेदप्रकाश सिंह सहायक चकबंदी अधिकारी बिजनौर
-रमेश कुमार सहायक चकबंदी अधिकारी बलिया
-वीर विक्रम गौड़ सहायक चकबंदी अधिकारी सहारनपुर
-बता दें, इन लोगों के विरूद्ध पूर्व में कुछ दंडात्मक कार्रवाई भी की जा चुकी हैं।
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इनके खिलाफ भी हुई कार्रवाई
-इसी प्रकार सहारनपुर में तैनात चकबंदी अधिकारी रामकेश कटियार, मुजफ्फरनगर में तैनात चकबंदी अधिकारी सचेन्द्र बहादुर सिंह और लखनऊ में तैनात चकबंदी अधिकारी राम किशोर गुप्ता को बर्खास्त किया गया है।
-इनके अलावा अमरोहा में तैनात चकबंदी अधिकारी अजब सिंह और सहायक चकबंदी अधिकारी लक्ष्मीकांत सरोज को प्रारंभिक मूल वेतन पर प्रत्यावर्तित किया गया है।
क्या कहते हैं राज्य कर्मचरी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष
-राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी ने बताया, सरकार का यह फैसला अगर भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों के खिलाफ लिया गया है तो राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद् इसका स्वागत करता है। लेकिन अगर जिनकी आयु 50 साल से अधिक हो गई है और इस आधार पर यह फैसला लिया गया है तो यह फैसला बिल्कुल गलत है।
-क्योंकि जब सरकार दिव्यांगों को नौकरी देती है तो इस बात की गारंटी नहीं लेती है कि यह कितना काम करेंगे। किसी की कार्यक्षमता के आधार पर उसे नौकरी से निकाला नहीं जा सकता है। यह नियम तर्कसंगत नहीं है।





