भयावह अरे ये क्या: एक हज़ार से भी अधिक चमगादड़ों के बीच बरसों से रह रही एक नेत्रहीन महिला

कोरोना संक्रमण फैलने के बाद से चमगादड़ों से हर शख्‍स को डर लगने लगा है। संक्रमण के पीछे चमगादड़ों को मुख्‍य वजह बताया जाता है लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एक महिला बरसों से चमगादड़ों के बीच जी रही है। यह महिला नेत्रहीन है और उसके घर में एक दो नहीं, एक हज़ार से भी अधिक चमगादड़ों का बसेरा है।

दुनिया में फैली कोरोना महामारी के लिए चमगादड़ को जिम्‍मेदार बताया जा रहा है लेकिन गुजरात की एक नैत्रहीन महिला सैकड़ों चमगादड़ों के बीच कई साल से जीवन बिताने को मजबूर है।

महिला के पैत्रक घर की लकडी की छत पर ये चमगादड़ दिन रात लटके रहते हैं, कोरोना के भय से पडौसी इस महिला से दूरी बनाए हुए हैं।

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गुजरात के साबरकांठा जिले के प्रांतिज में गुर्जर की पोल नामक गली में एकाकी जीवन व्यतीत कर रही नेत्रहीन विधवा महिला के घर में करीब तीन साल से सैकड़ों चमगादड़ों ने डेरा डाल रखा है।

दुनिया में फैली कोरोना महामारी के लिए चमगादड को ही जिम्‍मेदार बताया जा रहा है इसलिए मारे डर के इस महिला के पास भी कोई पड़ोसी नहीं आता।

हालांंकि महिला के लिए पड़ोसियों ने दोनों वक्त के भोजन की व्यवस्था कर रखी है। आजकल कोविड19 वायरस जनित कोरोना महामारी से पूरी दुनिया भयभीत है, चमगादडों को इस बीमारी का मुख्‍य कारण माना जा रहा है।

कलाबेन बताती हैं कि प्रसव के दौरान 45 साल पहले उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी, करीब 18 साल पहले उनके पति भी चल बसे अब वह अकेले इस पुराने मकाने में रहती है जिसकी छत लकड़ी से बनी है। कलाबेन की दो पुत्रियां थी जिसमें से एक हैदराबाद में रहती है जबकि दूसरी की मौत हो चुकी है।

कलाबेन पंडया के घर में 1000 से भी ज्यादा चमगादड़ करीब 3 साल से जमे हुए हैं। चमगादड़ोंं को कई बार भगाया गया लेकिन वे फिर यहां आ जाते कलाबेन इनके बीच डर के माहौल में गुजर बसर के लिए मजबूर हैं।

कोरोना वायरस चमगादड़ से फैलने की खबर के बाद से इसके डर के कारण अड़ोस-पड़ोस की महिलाओं ने भी कलाबेन से दूरियां बना ली है लेकिन कलाबेन इन्‍हीं चमगादड़ों के बीच जीने को मजबूर हैं।

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