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भारतीय संस्कृति को मानते हुए इस अमेरिकन महिला ने नहीं उतारी रुद्राक्ष की माला तो…

पूंडरी। अमेरिकन महिला पामेला ईव सोलोमन को भारतीय संस्कृति भाई तो उसने रुद्राक्ष की माला धारण कर दी। पति ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन उसने माला उतारने से मना कर दिया। इसी बात पर पति ने उससे तलाक मांग लिया। इसके बाद वह अंदर से पूरी तरह से टूट गई, लेकिन उसके बाद उसने सोचा कि वो अब आजाद हो गई। अब पामेला भारतीय सभ्यता और संस्कृति में पूरी तरह से रच बस गई हैं।भारतीय संस्कृति को मानते हुए इस अमेरिकन महिला ने नहीं उतारी रुद्राक्ष की माला तो...

57 वर्षीय पामेला का कहना है कि अमेरिका के लोगों में आत्मीयता और संवेदना है, मगर भावनाओं की कमी है। वह इन दिनों कैथल के गांव फरल में अपने धर्मभाई सतीश राणा के निवास पर रह रही हैं। वह भारत की संस्कृति और सभ्यता से इतनी प्रभावित हैं कि अब भारत में ही बस जाने का इरादा रखती हैं।

पांच अप्रैल 2018 को जब पामेला भारत आई तो तब से ही अपने भाई सतीश के घर पर रह रही है। सतीश गांव में ही स्कूल चलाते हैं तो पामेला अब बदला हुआ नाम वानेजा आनंदा स्कूल में ही उनकी मदद करती हैं। वे कहती है कि आध्यात्म का रास्ता और भारत के लोगों की रिश्तों को महत्व देने की खूबी उसे सात समुदर पार से यहां खींच लाई।

ऐसे शुरू हुआ अध्यात्म का सफर

वानेजा बताती है कि 2009 में एक महिला मित्र कैलिफोर्निया गई और गुरु नित्यानंद को मिली। उन दिनों वे गुरु नाम के शब्द से बिल्कुल अनभिज्ञ थी। उसकी मित्र ने उसे एक डीवीडी दी और देखने व सुनने को कहा। उसने डीवीडी देखी व सुनी। कुछ दिनों बाद एक शिष्य जो गुरु के बहुत नजदीक था, उसने चार दिन के सत्र में शामिल होने को कहा। इस सत्र ने उसे आत्मिक व बौद्धिक स्तर पर हर तरह से बदल दिया। मार्च 2010 में स्वामी नित्यानंद पर एक केस दर्ज हुआ। उस समय उसके लगभग सारे अनुयायी छोड़कर चले गए। केवल 100 के लगभग अनुयायी रहे, जिनमें वो भी एक थी। 2012 में नित्यानंद के शिष्यों ने उसे संगठन से बाहर कर दिया।

भारत और इसकी संस्कृति से वानेजा बहुत प्रभावित थी, इसलिए भारत भ्रमण को पहुंच गई। भारत में उसने चिदंबरम, कांचीपुरम, मीनाक्षी मंदिर, शिरड़ी, एलोरा की गुफाएं, केरल, कोयंबटूर, कोचीन, चेन्नई, अरुणाचल पर्वत, उत्तरकाशी, ऋषिकेश, ज्वाला जी, चिंतपूरनी, नैना देवी, आनंदपूर साहिब, स्वर्णमंदिर, चंडीगढ़, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल और कैथल सहित कई स्थानों का भ्रमण किया।

2016 में कौल गांव के धर्मवीर से मिली और वहीं पर ठहरी थी। कौल में ही स्कूल संचालक सतीश राणा से मुलाकात हुई, जिन्होंने उसे अपनी धर्म की बहन बनाया। 21 मार्च 2017 को वह फिर से अमेरिका चली गई और अब पांच अप्रैल 2018 को भारत आ गई। तब से गांव फरल में अपने धर्म भाई के साथ मिलकर स्कूल में काम कर रही है।

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