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रात के भोजन और सोने के बीच जरूरी होना जानिए अंतर

जो लोग कम से देर से लौटते हैं, उनके साथ तो यह आम बात है कि वे घर लौटकर खाना खाते हैं और जल्दी ही सो जाते हैं । किन्तु, कई अन्य लोगों की भी आदत होती है कि वे भोजन के बाद तुरंत ही सो जाते हैं । यह आदत अच्छी नहीं है । भारत मेन तो यह परंपरागत रूप से कहा जाता रहा है कि रात का भोजन (भारत में इसे प्रायः ‘शाम का’ कहा जाता है ) जल्दी ही कर लेना चाहिए । आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और पौषण विज्ञान के मुताबिक रात का भोजन जल्दी कर लेने की बात तो उतनी जरूरी नहीं है जितना यह जरूरी है कि हम भोजन के बाद जल्दी ही सोये नहीं । अच्छा तो यह है कि खाने और सोने के बीच दो घंटे का अंतर रखें; यदि ऐसा करना आपके काम के समय की मांग या किसी भी अन्य कारण से संभव नहीं हो तो भी प्रयास यह होना चाहिये कि भोजन के कम-से कम एक घंटे बाद ही सोये । इस बात का आधार या इसका कारण क्या है ? आइए जानें कि ऐसा नहीं करने के क्या नुकसान हैं:रात के भोजन और सोने के बीच जरूरी होना जानिए अंतर

1.  पाचन ठीक तरह से नहीं होता:

यदि हम भोजन के तुरंत बाद सो जाते हैं, तो चूंकि हमारे सभी शारीरिक तंत्र यानि पाचन-तंत्र भी सुस्त हो जाता है । इसलिए भोजन का पाचन धीमा होता है या आधा-अधूरा होता है । यदि 10-15 मिनट टहलने के बाद दायी करवट लेटते है तो यह तो अच्छा है; किन्तु नींद नहीं लें और थोड़ा सा लेटने के बाद फिर कुछ हल्का-फुल्का काम या पढ़ने-लिखने, मनोरंजन, बातचीत जैसे काम करें तथा एक-डेढ़ घंटे बाद सोये तो अच्छा रहेगा ।

2.  एसिडिटि (अम्लता) बढ़ने की आशंका रहेगी:

चूंकि सोने के समय आपकी हलचल रुक जाती है, पाचन-तंत्र भी सुस्त होता है, तो यदि पाचक रस (जो अम्लीय होते हैं) पर्याप्त मात्र में निकले (स्रावित हुए) हैं, उनकी भोजन के साथ क्रिया पूरी नहीं होती और वे पूर्ण उदासीन (neutralize) नहीं हो पते हैं । इसलिए आपके आमाशय में अधिक अम्ल रह जाता है । यह भी एसिडिटि की समस्या का एक बड़ा कारण है। यदि आप भोजन के दो घंटे बाद सोएँगे तो एक गिलास तक पानी पीकर अतिरिक्त अम्लों को अप्रभावी बना सकेंगे । पाचन व उत्सर्जन क्रियाओं पर भी इसका अच्छा असर होगा ।

3.  मोटापा बढ़ने की संभावना बढ़ेगी:

भोजन के बाद रात को सोना ही तो है, यह सोचकर कई लोग रात में अधिक चिकनाई वाला, तला हुआ, चटपटा या गरिष्ठ भोजन करते हैं । कई लोग रात के भोजन में अधिक भी खाते हैं । ऐसे में मोटापा बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है । इससे दिन में भी भोजन के बाद सुस्ती आने की प्रवृत्ति भी होने लगती है ।

4.  भोजन में संतुलन का ध्यान कम रहेगा:

यह देखा गया है, कि यदि हम सोने से पहले का आखिरी काम ‘भोजन’ करते हैं; तो हमारा इस बात पर कम ध्यान रहता है कि हमारा रात का भोजन संतुलित हो । उसमें पर्याप्त मात्र में हरी सब्जियाँ, सलाद, फल, आदि हो और यदि दिन के कुल भोजन में असंतुलन हुआ है तो जिस भोजन-वर्ग’ की चीज को हमने पहले नहीं खाया है, उसे रात के भोजन में अधिक शामिल करके हम पूरे दिन के भोजन को संतुलित कर सकते हैं । शाम को या रात को जल्दी भोजन करने पर इस बात का अधिक ख्याल रख सकेंगे, अतः रात का भोजन सोने से पर्याप्त पहले कर लेने के कई वैज्ञानिक व व्यावहारिक लाभ है।

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