औरैया हादसे का कुछ ऐसा था मंजर, खून से लथपत था…

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में प्रवासी मजदूरों से भरी डीसीएम में ट्रक ने टक्कर मार दी जिससे 24 मजदूरों की मौत हो गई. इस घटना में 15 लोग घायल हैं. घायलों को जिला अस्पताल व सैफ़ई पीजीआई भेजा गया है. जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर घायलों को रेस्क्यू कराया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं. इसी बीच घटनास्थल की तस्वीरें भी सामने आई हैं.

घटना शनिवार तड़के 3.30 तीन बजे की है. डीसीएम में ट्रक ने टक्कर मार दी. 24 मजदूरों की मौत घटनास्थल पर हो गई जबकि कई लोग घायल हो गए. घटना के वक्त अंधेरा था, इसलिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में काफी दिक्कत आई. प्रशासन के साथ आसपास के लोगों ने मदद की और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया.

अस्पताल में एक घायल मजदूर ने कहा कि वे लोग राजस्थान से आ रहे थे. ज्यादातर मजदूर नींद की हालत में थे, तभी पीछे से किसी ने टक्कर मार दी. धमाके के साथ आवाज हुई. कई लोगों को पता भी नहीं चल पाया कि क्या हुआ. जब उसे होश आया तो उसने खुद को अस्पताल में पाया.

कानपुर के आईजी मोहित अग्रवाल ने पीटीआई को बताया कि हादसा तब हुआ जब दिल्ली से आने वाली डीसीएम पर बैठे मजदूरों ने सुबह से पहले चाय पीने की इच्छा जाहिर की. ये मजदूर औरैया-कानपुर देहात रोड पर सड़क के किनारे एक ढाबे पर चाय पीने लगे.

इस दौरान कुछ मजदूर ढाबे पर थे तो कुछ डीसीएम में ही सोए रहे. तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने मजदूरों की एक डीसीएम को जोरदार टक्कर मार दी. ये टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों ही गाड़ियां पलट गईं और सड़क के किनारे एक गड्ढ़े में जा गिरीं.

औरैया के सर्किल ऑफिसर सुरेंद्रनाथ यादव ने कहा कि डीसीएम को ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी. हादसे के बाद दोनों गाड़ियां पलट गई. रिपोर्ट के मुताबिक कई मजदूरों की मौत ट्रक के नीचे दबने से हुई है. इस ट्रक में चूने का पैकेट लदा हुआ था. हादसे में मरने वाले मजदूर बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के थे.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं. कानपुर के मंडलायुक्त और आईजी कानपुर घटना की जांच कर मुख्यमंत्री कार्यालय को इस घटना की रिपोर्ट सौंपेंगे. ये दोनों अधिकारी घटनास्थल पहुंच चुके हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन मजदूरों के परिवार वालों को घटना की सूचना देने की है. मजदूरों के पास कोई खास दस्तावेज नहीं था. इस वजह से इनकी पहचान पता करना बेहद मुश्किल काम है. हालांकि प्रशासन घायल मजदूरों के ठीक होने का इंतजार कर रहा है. ताकि उनके बयान के आधार पर मजदूरों के परिवार वालों से संपर्क किया जा सके.

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