सर्दियों में आपके लिए रामबाण हैं अश्वगंधा की चाय, जान लें ये बड़े फायदे

आयुर्वेद की सबसे प्रसिद्ध जड़ी बूटियों में अश्वगंधा का नाम टॉप पर है। सदियों से कई रोगों के इलाज में अश्‍वगंधा का इस्‍तेमाल किया जाता रहा है। महत्‍वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों में अश्‍वगंधा का नाम लिया जाता है। अथर्ववेद में भी अश्‍वगंधा के उपयोग एवं उपस्थिति के बारे में बताया गया है। भारतीय पारंपरिक औषधि प्रणाली में अश्‍वगंधा को चमत्‍कारिक एवं तनाव-रोधी जड़ी बूटी के रूप में जाना जाता है। इस वजह से तनाव से संबंधित लक्षणों और चिंता विकारों के इलाज में इस्‍तेमाल होने वाली जड़ी बूटियों में अश्‍वगंधा का नाम भी शामिल है। अश्वगंधा को यह नाम इसलिए मिला है क्योंकि इसमें अश्व (घोड़ा) जैसी गंध आती है। साथ ही इसके सेवन से व्यक्ति को घोड़े जैसी स्फूर्ति और ताकत भी मिलती है। यहां जानें क्यों और कैसे महिलाओं और पुरुषों को अश्वगंधा की चाय बनाकर पीनी चाहिए.

-अश्वगंधा का सेवन एक दवाई के रूप में सालभर किया जाता है। लेकिन सर्दियों में सही तरह से इसका सेवन करके अतिरिक्त लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

-अश्वगंधा की तासीर गर्म होती है। यह शरीर में आवश्यक मात्रा में पित्त की वृद्धि करती है। इससे सर्दियों में ठंड नहीं सताती है। जिन लोगों को अधिक ठंड लगती है, उन्हें अश्वगंधा की चाय का सेवन करना चाहिए।

– अश्वगंधा लंबे समय से आयुर्वेदिक चिकित्सा में सुगर के उपचार के लिए इस्तेमाल किया गया है। डायबिटीज के उपचार में अश्वगंधा के उपयोग पर अनुसंधान ने सकारात्मक परिणाम का संकेत दिया है। प्रयोगों ने दर्शाया कि जब अश्वगंधा का सेवन चार सप्ताह की अवधि के लिए किया गया, तब उपवास और दोपहर के खाने के बाद रक्त शर्करा के स्तर में काफी कमी आई।बहुत सारे मामलों में देखा गया है कि अश्वगंधा खाने से ब्लड शुगर स्तर कम होता है।

– तनाव की समस्या कई बीमारियों का कारण बन सकती है। चूहों पर किए गए शोध के अनुसार, आयुर्वेदिक औषधि अश्वगंधा में मौजूद एंटी-स्ट्रेस गुण तनाव कम करके इसके कारण होने वाली बीमारियों से बचा सकता है।

– अश्वगंधा एक शक्तिवर्धक औषधि है, जो पुरुषों की यौन क्षमता को बेहतर कर वीर्य की गुणवत्ता में सुधार कर सकती है। 2010 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, अश्वगंधा का उपयोग करने से स्पर्म उत्तमता के साथ-साथ उसकी संख्या में भी वृद्धि हो सकती है। यह शोध स्ट्रेस (ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, केमिकल स्ट्रेस व मानसिक तनाव) के कारण कम हुई प्रजनन क्षमता पर किया गया है

– शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर नहीं होगी, तो बीमारियों से लड़ना मुश्किल हो जाता है। विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों के मुताबिक, अश्वगंधा चूर्ण के उपयोग से रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार हो सकता है। इसमें मौजूद इम्यूनोमॉड्यूलेटरी प्रभाव शरीर की जरूरत के हिसाब से प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव कर सकता है, जिससे रोगों से लड़ने में मदद मिल सकती है। इसलिए, माना जाता है कि अश्वगंधा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकता है।

– स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही और बदलती दिनचर्या तेजी से मस्तिष्क की कार्य क्षमता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में जानवरों पर किए गए विभिन्न अध्ययनों में पाया गया कि अश्वगंधा मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और याददाश्त पर सकारात्मक असर डाल सकता है।

दो रूपों में मिलती है अश्वगंधा

-मार्केट में अश्वगंधा दो रूपों में मिलती है। एक है अश्वगंधा की सूखी हुई जड़ और दूसरा रूप है इस जड़ को पीसकर तैयार किया गया पाउडर।

-अब अश्वगंधा की चाय बनाने की विधि और इसके सेवन का तरीका इस बात पर निर्भर करता है कि आप अश्वगंधा के किस प्रकार का उपयोग कर रहे हैं। क्योंकि दोनों को उपयोग करने की विधि और मात्रा में काफी अंतर है।

अश्वगंधा पाउडर से चाय बनाने की विधि

-अश्वगंधा पाउडर से एक कप चाय बनाने के लिए आप सबसे पहले डेढ़ कप पानी को गैस पर उबलने के लिए रख दें। जब पानी तेज गर्म हो जाए तो उसमें एक छोटा चम्मच अश्वगंधा पाउडर डालें।

-इस पानी को तब तक पकाएं, जब तक यह 1 कप ना रह जाए। ध्यान रखें इसे जल्दी उबालने के लिए तेज आंच का उपयोग ना करें। बल्कि धीमी आंच पर 10 मिनट तक उबलने दें। आपके लिए अश्वगंधा की चाय तैयार है। यदि आप इसमें कुछ मीठा मिलाना चाहते हैं तो चीनी और गुड़ के उपयोग से बचें।

-जो लोग पूरी तरह स्वस्थ हैं लेकिन उन्हें सर्दी बहुत अधिक लगती है और इसके कारण बार-बार खांसी,जुकाम, बुखार इत्यादि की समस्या होती है रहती है, वे लोग अश्वगंधा की आधा कप चाय का नियमित सेवन कर सकते हैं।

-यहां अश्वगंधा की चाय के सेवन से जुड़ी जानकारी स्वस्थ लोगों के लिए दी गई है। यदि आपको किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या है तो आयुर्वेदिक डॉक्टर से परामर्श करके ही इस औषधि का सेवन करें। क्योंकि आपके शरीर की जरूरत के हिसाब से वे आपको अलग मात्रा और तरीका बताएंगे।

-अश्वगंधा के सेवन से शरीर में पित्त की वृद्धि होती है। यदि आपके शरीर में पहले से ही पित्त बढ़ा हुआ रहता है तो आपको इस चाय के सेवन से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

– प्रेगनेंसी एक ऐसा समय होता है जब कुछ भी खाते समय बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है। गर्भावस्था में अश्वगंधा के सेवन से बचना ही बेहतरह होता है। अगर प्रेग्नेंट महिला अश्वगंधा लेती है, तो एस्ट्रोजन हॉर्मोन का लेवल बढ़ सकता है, जो ब्लीडिंग या सिरदर्द जैसी समस्याएं दे सकता है।

– अश्वगंधा में जो कम्पाउंड होते हैं वे दिमाग को एक्टिव कर देते हैं। तो ऐसे में अगर आपको नींद न आने की दिक्कत है या आप इन्सोमनिया से परेशान हैं तो रात के समय अश्वगंधा खाने से बचें यह नींद में बेचैनी या नींद न आने की समस्या दे सकता है।

– अश्वगंधा की पत्तियों का ज्यादा इस्तेमाल आपके पेट के लिए हानिकारक हो सकता है। इससे आपके पेट में दर्द, दस्त, उल्टियां, पेट गैस जैसी समस्यां हो सकती हैं।

-इस चाय को हल्का ठंडा होने दें और फिर इसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन करें। ध्यान रखें कि बहुत गर्म दूध, चाय या पानी में शहद नहीं मिलाना चाहिए।

-अश्वगंधा की चाय में चीनी और गुड़ का उपयोग इसलिए ना करें क्योंकि अश्वगंधा खुद बहुत गर्म होती है और गुड़ भी गर्म तासीर का होता है। जबकि चीनी बनाने में कैमिकल प्रॉसेस का उपयोग किया जाता है।

अश्वगंधा की जड़ से चाय बनाने का तरीका

– अश्वगंधा की सूखी हुई जड़ के पाउडर के 2 चम्मच लें।
– इसे 3.5 कप उबलते हुए पानी में डालें।
– इसे 15 मिनट तक उबलने दें।
– इसे अच्छे से छान लें ताकि कोई कण पानी में ना रहे।
– रोज़ 1/4 कप पिएं।

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