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अब जोधपुर सेंट्रल जेल में ही सुनाया जाएगा आसाराम और उसके चार साधकों पर फैसला

जयपुर। आसाराम से जुड़े देश के सबसे चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में बुधवार को सजा सुनाई जाएगी।जोधपुर एससी,एसटी विशेष कोर्ट के जज मधुसूदन शर्मा आरोपित आसाराम,उसके साधक शिवा,प्रकाश,शरतचंद्र और शिल्पी का फैसला सुनाएंगे।सुरक्षा को देखते हुए पुलिस के आग्रह पर जोधपुर सेंट्रल जेल में ही फैसला सुनाया जाएगा।अब जोधपुर सेंट्रल जेल में ही सुनाया जाएगा आसाराम और उसके चार साधकों पर फैसला

इस मामले में कोर्ट यदि आसाराम सहित 4 अन्य आरोपितों को दोषी करार देती है तो उन्हे अधिकतम 10 साल तक के कारावास की सजा सुनाई जा सकती है। करीब 5 साल पुराने इस मामले को लेकर देशभर के लोगों की निगाहें लगी हुई है। फैसला सुनाए जाते समय आसाराम समर्थकों की भीड़ एकत्रित होने पर हालात बिगड़ने की आशंका के चलते राजस्थान पुलिस हाई अलर्ट मोड पर है। जोधपुर में 21 से 31 अप्रैल तक दस दिन के लिए धारा 144 लागू है । इस बीच जयपुर पुलिस मुख्यालय से पुलिस की आधा 6 कम्पनियां जोधपुर भेजी गई है।

जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट में तैनात तीन आईपीएस और करीब एक दर्जन आरपीएस अधिकारियों के अतिरिक्त आसपास के जिलों से पुलिस अधिकारी जोधपुर भेजे गए हैं। पुलिस महानिदेशक ओ.पी.गल्होत्रा ने मंगलवार को सभी रेंज महानिरीक्षकों एवं जोधपुर पुलिस कमिश्नर से बात कर हालात की जानकारी ली। गल्होत्रा के निर्देश पर प्रदेश के सभी जिलों में स्थित आसाराम के आश्रमों को खाली करा लिया गया है।

यहां रह रहे आसाराम के साधकों को अपने-अपने घर भेज दिया गया है। जोधपुर स्थित दो आश्रम रविवार को ही खाली करा लिए गए थे। मंलगवार को जोधपुर शहर में प्रवेश के सभी मार्गों पर बेरिकेट्स लगा दिए गए। प्रत्येक वाहन को चैक करने के बाद ही शहर में प्रवेश करने दिया जा रहा है। सोमवार रात से होटलों एवं धर्मशालाओं में प्रत्येक 4 घंटे में तलाशी की जा रही है। जोधपुर पुलिस कमिश्नर अशोक राठौड़ ने बताया कि शहर में आसाराम के साधक प्रवेश नहीं कर सकें और उत्पात नहीं हो,इसके पूरे प्रबंध कर लिए गए हैं। ट्रेन और बसों पर भी निगरानी रखी जा रही है। रेलवे स्टेशन का एक गेट बंद कर दिया गया,वहीं बस स्टैंड पर 150 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं,इनमें से 100 हथियारलैस हैं ।

यह है मामला

आसाराम पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पीड़िता उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर की रहने वाली है। पीड़िता ने जब आसाराम पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे तब वह छिंदवाड़ा आश्रम के कन्या छात्रावास में 12वीं कक्षा में पढ़ती थी।

जानकारी के अनुसार पीड़िता के पिता के पास 7 अगस्त,2013 को छिंदवाड़ा आश्रम से फोन आया कि उनकी बेटी बीमार है। इस पर पीड़िता के पिता वहां पहुंचे तो उन्हे बताया गया कि उनकी बेटी पर भूत-प्रेत का साया है ,जिसे सिर्फ आसाराम ही ठीक कर सकते हैं। पीड़िता के माता-पिता अपनी बेटी के साथ 14 अगस्त को आसाराम से मिलने जोधपुर आश्रम में पहुंचा। इसके अगले दिन 15 अगस्त को आसाराम पे 16 साल की पीड़िता को अपनी कुटिया में बुला लिया और उसके साथ 1 घंटे तक यौन उत्पीड़न किया।

पीड़िता ने इस मामले की जानकारी अपने माता-पिता को दी तो उन्होंने 20 अगस्त,2013 को दिल्ली कमलानगर पुलिस थाने में रात 2 बजे एफआरआर दर्ज कराई थी। मामला जोधपुर ट्रांसफर कर दिया गया। जोधपुर पुलिस ने जांच के बाद आसाराम को 30 अगस्त की आधी रात इंदौर स्थित आश्रम से गिरफ्तार किया था ।

 जेल में फैसला सुनाए जाने के कुछ ही उदाहरण

राजस्थान पुलिस और जेल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार देश में जेल में फैसला सुनाए जाने के कुछ ही उदाहरण है। इनमें बुधवार को आसाराम का मामला भी शामिल हो जाएगा। जानकारी के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री स्व.श्रीमती इंदिरा गांधी के हत्यारों बेंअत सिंह और सतवंत सिंह को तिहाड़ जेल में फैसला सुनाया गया था।

इसी प्रकार आॅर्थर रोड़ जेल में आतंकी अजमल कसाब,सुनारिया जेल में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम-रहीम को फैसला सुनाया गया था । वर्ष 1985 में जोधपुर सेंट्रल जेल में टाडा कोर्ट बनी थी यह वर्ष 1988 तक चली थी,तब 365 खाली स्थान समर्थक यहां थे ।  

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