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अन्ना का या है अविश्वास का डर? आखिर क्यों जल्द संसद सत्र खत्म करने के मूड में सरकार

संसद के बजट सत्र का दूसरा हिस्सा पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ा हुआ है. विपक्ष की ओर से लगातार जारी हंगामे के बीच खबर है कि सरकार इसी शुक्रवार को सत्र समाप्ति की घोषणा कर सकती है. वैसे ये सत्र 6 अप्रैल तक चलना है. सरकार के इस तरह बीच में ही सदन के सत्र को खत्म करने की मंशा के पीछे कई कारण गिनाये जा रहे हैं, इनमें अविश्वास प्रस्ताव का डर, अन्ना का प्रस्तावित आंदोलन और सहयोगियों का बागी तेवर अपनाना शामिल हैं.

1. क्या अविश्वास प्रस्ताव है वजह?

आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते हैं. वे पिछले तीन दिन से इसकी कोशिश कर रहे हैं लेकिन लोकसभा अध्यक्ष सदन के व्यवस्थित न होने का तर्क देकर इसे स्वीकार नहीं कर सकी हैं. अविश्वास प्रस्ताव पर दोनों पार्टियां पहले अकेली थीं लेकिन अब उनके साथ विपक्षी दल जुड़ते जा रहे हैं.

हालांकि सरकार के पास स्पष्ट बहुमत है और उसे अविश्वास प्रस्ताव से कोई खतरा नहीं है लेकिन फिर भी वो नहीं चाहती कि विपक्ष को इस प्रस्ताव के चलते उसके खिलाफ एकजुट होने का मौका मिले. साथ ही शिवसेना जैसे कई दल अविश्वास प्रस्ताव के मौके को केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ अपनी भड़ास निकालने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. सरकार नहीं चाहती कि उसके चार साल पूरे होने के समय पीएम मोदी को लेकर ये संदेश जाए कि वो सहयोगियों को ही साथ लेकर नहीं चल रहे हैं. एनडीए में फूट से सरकार गिरेगी तो नहीं लेकिन उसकी छवि पर तो असर पड़ेगा ही.

2. अन्ना के आंदोलन का डर!

समाजसेवी अन्ना हजारे मोदी सरकार के खिलाफ महाधरने की तैयारी में हैं. 23 मार्च से ही दिल्ली के रामलीला मैदान पर अन्ना हजारे एक बार फिर ताल ठोंकेंगे. इस बार अन्ना हजारे ने किसानों के हक के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है. लोकपाल भी उनके एजेंडे पर है. सरकार की उन्हें मनाने की कोशिशें अब तक विफल रही हैं. सरकार के खिलाफ अन्ना को समर्थन देकर विपक्ष मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर सकता है. संसद का सत्र जारी रहने पर इस आंदोलन की धार और ज्यादा तेज हो सकती है और मोदी सरकार की मुश्किलें खड़ी कर सकती है.

3. 23 मार्च को ही हैं राज्यसभा चुनाव

मोदी सरकार 23 मार्च को संसद का सत्र समाप्त करने का मन बना रही है और इसी दिन राज्यसभा की खाली 58 सीटों के लिए अलग-अलग राज्यों में चुनाव होने हैं. इस बार यूपी-झारखंड और कर्नाटक जैसे राज्यों में जिस तरह प्रत्याशी उतारे गए हैं उससे यहां क्रॉस वोटिंग देखने को मिल सकती है. अगर ऐसा हुआ तो विपक्षी दलों को सरकार को घेरने का एक और मुद्दा मिलेगा. 23 मार्च को ही संसद का सत्र खत्म करने से इससे बचा जा सकता है.

क्यों हो रहा है हंगामा?

गौरतलब है कि बजट सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष कई मुद्दों को लेकर हंगामा कर रहा है. पहले कांग्रेस नीरव मोदी, राफेल डील जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर रही थी. दोनों सदनों में टीडीपी के सांसद आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं, टीडीपी के सांसदों के हंगामे के कारण ही संसद सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है.

हंगामे के बीच टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस की ओर से सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने की तैयारी चल रही है. हालांकि, हंगामे के कारण ही ये प्रस्ताव भी पेश नहीं हो पाया है. विपक्ष के हंगामे के कारण ही सरकार इस सदन में तीन तलाक बिल, वित्त और विनियोग विधेयक 2018 जैसे अहम बिलों पर चर्चा नहीं करा सकी और ना ही बिल पास हो सके हैं.

विपक्ष ने सरकार पर लगाया आरोप

संसद ना चल पाने के लिए पूर्व स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने सरकार को जिम्मेदार बताया. उनका कहना है कि 10 राजनीतिक पार्टियों ने बैठक में निर्णय किया है कि राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू को बताया जाए कि हम सदन को चलाना चाहते हैं लेकिन सरकार ऐसा करना नहीं चाहती. सरकार मुद्दों से भाग रही है. सभी ने एक साथ मिलकर सभापति से कहा है कि सदन में हमको बोलने की इजाजत दी जाए.

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